पश्चिम बंगाल में नई नवेली बीजेपी की सरकार के बीच तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के अस्थायी मुख्यालय ‘तृणमूल भवन’ को खाली करने का नोटिस मिला है. पूर्वी कोलकाता के टॉपसिया इलाके में ईएम बाईपास के पास स्थित यह बहुमंजिला इमारत किराए पर ली गई थी और पिछले कई सालों से पार्टी का मुख्य दफ्तर यहीं से चल रहा था.
जानकारी के मुताबिक, इमारत के मालिक ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व से भवन खाली करने को कहा है. बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद दफ्तर के बाहर हुई तोड़फोड़ और सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के चलते यह फैसला लिया गया है.
इमारत के मालिक और ‘मॉडर्न डेकोरेटर्स’ कंपनी के प्रमुख मोंटू साहा ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व को भवन खाली करने का नोटिस दिया है. जानकारी के मुताबिक, उन्होंने पार्टी नेताओं से इस बारे में बातचीत भी की है. साहा ने साफ कर दिया है कि इमारत खाली करने के लिए समय तय कर दिया गया है. तृणमूल नेतृत्व ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि अगले दो महीनों के भीतर पूरा दफ्तर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाएगा.
विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में कई जगह राजनीतिक तनाव और हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं. इसी बीच इमारत के मालिक मोंटू साहा ने कहा कि भवन खाली कराने के फैसले के पीछे कोई राजनीतिक दबाव या निजी वजह नहीं है. उन्होंने बताया कि 4 मई को चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद इमारत के बाहर भारी तोड़फोड़ हुई थी. साहा के मुताबिक, अगर संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो उसकी जिम्मेदारी और नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ेगा.
मोंटू साहा ने साफ किया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से दफ्तर खाली करने को कहा है. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के साथ उनका कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है और तृणमूल ने हमेशा तय समय पर किराया दिया है. फिलहाल इस मामले पर पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
2021 विधानसभा चुनाव में जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस ने टॉपसिया स्थित अपने पुराने मुख्यालय को नया रूप देने का फैसला किया था. इसके तहत पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर वहां आधुनिक बहुमंजिला इमारत बनाने का काम शुरू किया गया. इसी वजह से पार्टी ने 2022 में ईएम बाईपास के महानगरीय इलाके में एक दूसरी इमारत किराए पर लेकर उसे अस्थायी मुख्यालय बनाया था.
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शुरुआत में यह इमारत सिर्फ दो साल के लिए किराए पर ली गई थी, लेकिन टॉपसिया वाले मुख्य कार्यालय का काम पूरा न होने की वजह से इसका अनुबंध दो साल और बढ़ा दिया गया. इसी कारण पिछले चार सालों से यही जगह तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों का मुख्य केंद्र बनी रही.
इस अस्थायी दफ्तर में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के लिए अलग-अलग कमरे भी बनाए गए थे. पार्टी की लगभग सभी अहम बैठकें, चुनावी रणनीति से जुड़ी चर्चा और प्रेस कॉन्फ्रेंस इसी भवन में होती रही हैं. यहां रोजाना पार्टी के शीर्ष नेता, विधायक और मंत्री आते-जाते रहे. इस दफ्तर के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी और उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार संभालते रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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