11 सितंबर 1893 का वह दिन भारतीय इतिहास के सबसे स्वर्णिम अध्यायों में गिना जाता है, जब स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) ने अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद को संबोधित कर पूरी दुनिया में भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्ता का डंका बजाया था. इस ऐतिहासिक शिकागो संबोधन की वर्षगांठ पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने देश के युवाओं से एक बेहद खास अपील की है. गृह मंत्री ने युवाओं से आग्रह किया है कि वे स्वामी जी के भाषण को पढ़ें और खुद को राष्ट्र निर्माण के पवित्र उद्देश्य के लिए समर्पित करें.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा कि स्वामी विवेकानंद जी ने वर्ष 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में भारत को मानवता के लिए आध्यात्मिक उत्थान के स्रोत के रूप में स्थापित किया. उन्होंने आगे कहा कि इस ऐतिहासिक संबोधन की वर्षगांठ, जिसने दुनिया को भारत की संस्कृति और मूल्यों की समृद्धि से परिचित कराया, एक अवसर है जब देश की युवा पीढ़ी को स्वामी जी के विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिए.
11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद ने जब अपने भाषण की शुरुआत “Sisters and Brothers of America” (मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनो) शब्दों से की थी, तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था. इस भाषण ने वैश्विक स्तर पर भारतीय आध्यात्मिकता, सहिष्णुता और सार्वभौमिक भाईचारे का जो संदेश फैलाया, उसने पश्चिमी दुनिया को गहरी सोच में डाल दिया था. स्वामी जी ने भारत को ज्ञान और आध्यात्मिकता का केंद्र बताते हुए दुनिया को यह दिखा दिया था कि भारतीय संस्कृति में पूरी मानवता को जोड़ने की शक्ति है.
गृह मंत्री अमित शाह का यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब देश को आगे बढ़ाने में युवा शक्ति (Youth Power) की सबसे बड़ी भूमिका मानी जा रही है. अमित शाह का मानना है कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनके विचार आज भी देश के युवाओं के लिए सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हैं. यदि युवा उनके बताए मार्ग पर चलें, तो भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने के लक्ष्य को और तेजी से हासिल किया जा सकता है.
आज देशभर में शैक्षणिक संस्थानों, राजनीतिक मंचों और सामाजिक संगठनों द्वारा स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन की वर्षगांठ को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. गृह मंत्री अमित शाह का यह संदेश देश के करोड़ों युवाओं में राष्ट्रभक्ति, आत्मविश्वास और सेवा भाव जगाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है.
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