Uttarkashi Dharali Floods: उत्तराखंड में बीते 5 अगस्त को बादल फटने से उत्तरकाशी का धराली (Dharali) गांव तबाह हो गया. वहां लगभग 300 करोड़ लीटर पानी बरसा, बाढ़ और भू-स्खलन के कारण दर्जनों घर-मकान ध्वस्त हो गए. कई लोगों को जान गंवानी पड़ी, सैकड़ों लोग अभी लापता हैं. इस बीच सैटेलाइट (Cartosat 2 satellite) और ड्रोन से ली गई कुछ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वहां हुई बर्बादी को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.
भू-विशेषज्ञों के मुताबिक, धराली में ‘जलप्रलय’ का कहर बरपा, जिसमें मात्र 34 सेकेंड में पूरा गांव चपेट में आ गया. आपदा ने वहां के प्राकृतिक सौंदर्य को तहस-नहस कर दिया. इससे पहले तक वहां पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती थी. मगर, अब ड्रोन द्वारा लिए गए वीडियो में मलबे से ढंके हुए क्षेत्र और बर्बाद इमारतें साफ दिख रही हैं.
न्यूज एजेंसी ANI द्वारा साझा किए गए वीडियो में धराली का भयानक मंजर सामने आया है. वीडियो में मलबे से भरे क्षेत्र, बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कें और इमारतें दिखाई दे रही हैं. बचाव दल पीले वर्दी और हेलमेट पहनकर मलबे में फंसे लोगों को ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. MI-17 समेत 8 निजी हेलीकॉप्टर भी राहत अभियान में हिस्सा ले रहे हैं.
बचाव अभियान में आ रहीं कई चुनौतियां
बादल फटने के बाद धराली से अब तक 367 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है. हालांकि, बचाव अभियान में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं. मलबा हटाने के लिए तीन जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं, लेकिन 80 एकड़ में फैले मलबे को साफ करने में कम से कम चार दिन और लगने की संभावना है. अधिकारियों के मुताबिक, 100 से 150 लोगों के दबे होने की आशंका है, जिससे बचाव कार्य और भी जटिल हो गया है.
आपदा में धराली ने प्राकृतिक सौंदर्य खोया
धराली, जो पहले अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता था, अब मलबे के ढेर में तब्दील हो गया है. बाढ़ ने न केवल इमारतों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर मानसून के मौसम में पर्यटकों की भीड़ होती, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी.
इस क्षेत्र में और बारिश होने की संभावना
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है. हालांकि, भारी बारिश और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण बचाव दल को पहुंचने में दिक्कतें आ रही हैं. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में और बारिश की संभावना है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है. इस घटना ने हिमालयी क्षेत्र में आपदा जोखिम में कमी (DRR) की आवश्यकता को रेखांकित किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसे घटनाओं से निपटने के लिए प्रोएक्टिव स्ट्रेटजी की जरूरत है, जिसमें मौसम की चेतावनियों को प्रभावी तरीके से लागू करना और स्थानीय समुदायों को तैयार करना शामिल है.
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