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अंतरिक्ष की ऑर्बिट में गूंजा ‘वंदे मातरम्’! विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग पर वैज्ञानिकों को फोन पर क्या बोले पीएम मोदी?

Vikram-1 Launch 2026: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में आज एक ऐसा स्वर्णिम और अद्भुत अध्याय जुड़ गया है, जिसने पूरी दुनिया को भारत की बढ़ती स्वदेशी ताकत का लोहा मानने पर मजबूर कर दिया है. देश के पहले निजी तौर पर पूरी तरह विकसित ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ (Vikram-1) ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से आज दोपहर शानदार और सफल उड़ान भरते हुए अंतरिक्ष की 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा (ऑर्बिट) में अपने सभी पेलोड्स को पूरी सटीकता के साथ स्थापित कर दिया है.

इस सफलता के साथ ही अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में मानो ‘वंदे मातरम्’ गूंज उठा है. इस ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना देर किए स्काइरूट एयरोस्पेस की टीम को सीधे फोन लगाया और इस कड़क कामयाबी के लिए वैज्ञानिकों और देश के युवाओं की जमकर पीठ थपथपाई.

 

फोन पर गदगद हुए पीएम मोदी(Vikram-1 Launch)

‘विक्रम-1’ की सफल लॉन्चिंग का लाइव कार्यक्रम देखने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद खुश और गदगद नजर आए. उन्होंने तुरंत स्काइरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका को फोन मिलाया. पीएम मोदी ने फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि पवन, भरत और आपकी पूरी टीम को इस ऐतिहासिक सफलता की बहुत-बहुत बधाई. मैंने आज अपनी आंखों से यह पूरा लॉन्च कार्यक्रम देखा है.

आपकी पूरी टीम काफी युवा है और यही युवा जोश आज भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है. आपकी यह बेजोड़ उपलब्धि देश के करोड़ों युवाओं को बड़े सपने देखने और विज्ञान व अंतरिक्ष के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए हमेशा प्रेरित करेगी.

बताया क्यों सही था स्पेस सेक्टर को प्राइवेट करने का फैसला?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाने के साथ-साथ उन लोगों को भी कड़ा संदेश दिया जो सरकारी नीतियों पर सवाल उठाते थे. पीएम मोदी ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने भारत के स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोलने का एक बड़ा और ऐतिहासिक नीतिगत फैसला लिया था, तब कई राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस पर बड़े सवाल खड़े किए गए थे.

लेकिन आज विक्रम-1 की इस ऐतिहासिक कामयाबी (Vikram-1 Launch) ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि हमारा वह फैसला बिल्कुल सही था. अब भारत का निजी स्पेस सेक्टर भी इसरो (ISRO) के कंधे से कंधा मिलाकर दुनिया में अपनी एक मजबूत, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर पहचान स्थापित कर चुका है.

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2022 से शुरू हुई स्काइरूट की इस महा-यात्रा की पूरी कहानी

अब तक भारत में रॉकेट विकसित करने और उसे अंतरिक्ष में भेजने का पूरा जिम्मा सिर्फ इसरो के पास ही रहता था, लेकिन स्काइरूट ने आज इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है. इस कामयाबी के साथ ही भारत दुनिया का तीसरा ऐसा चुनिंदा देश बन गया है, जिसने निजी क्षेत्र की मदद से ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने का करिश्मा कर दिखाया है. स्काइरूट ने अपनी इस कड़क यात्रा की शुरुआत नवंबर 2022 में ‘प्रारंभ’ मिशन के तहत ‘विक्रम-एस’ नाम का सब-ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करके की थी.

लेकिन आज का यह ‘विक्रम-1’ मिशन उससे कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और जटिल था, क्योंकि इसका सीधा लक्ष्य पृथ्वी की कक्षा को भेदकर उपग्रहों को स्थापित करना था. पूर्व इसरो वैज्ञानिकों द्वारा खड़ी की गई इस स्वदेशी कंपनी ने आज साबित कर दिया है कि भारतीय मेधा जब ठान लेती है, तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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