पश्चिम बंगाल में किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है. राज्य में 30 मई से लड़कियों के लिए सर्वाइकल कैंसर से बचाव का मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है. इसके साथ ही अब मदरसों में पढ़ने वाली छात्राओं को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी की जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लड़कियां इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रह सकें.
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, मदरसों में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं के तहत संचालित होगी. जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर इस कार्यक्रम को जमीन पर लागू करेंगे. संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं.
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक माना जाता है. चिकित्सा विज्ञान में लगातार प्रगति के बावजूद यह बीमारी आज भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सही उम्र में एचपीवी वैक्सीन लगवा ली जाए तो सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर टीकाकरण कराने से इस बीमारी के लगभग 75 से 80 प्रतिशत मामलों को रोका जा सकता है. यही वजह है कि केंद्र सरकार लंबे समय से इसके खिलाफ जागरूकता और मुफ्त टीकाकरण पर जोर दे रही है.
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्वाइकल कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. दुनिया भर में हर साल करीब छह लाख नए मामले सामने आते हैं. वहीं कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी चिंताजनक बना हुआ है.
भारत की बात करें तो महिलाओं में यह दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है. आंकड़ों के अनुसार, हर एक लाख महिलाओं में लगभग 14 नए मरीज हर साल इस बीमारी का इलाज करवाते हैं, जबकि प्रति लाख नौ महिलाओं की मौत इस कैंसर के कारण हो जाती है. देश की विशाल आबादी को देखते हुए यह संख्या स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय है.
राज्य सरकार के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल को इस अभियान के लिए सात लाख वैक्सीन उपलब्ध कराई हैं. कार्यक्रम की शुरुआत कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित बिधाननगर उप-जिला अस्पताल से की गई.
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि निर्धारित आयु वर्ग की लड़कियां यह टीका मुफ्त में लगवा सकती हैं. आने वाले समय में मदरसों में भी नियमित रूप से टीकाकरण शिविर लगाए जाएंगे, ताकि किसी भी छात्रा को इस सुविधा से वंचित न रहना पड़े.
सरकार का मानना है कि यह अभियान सिर्फ टीकाकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे छात्राओं और उनके परिवारों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी. विशेष रूप से ग्रामीण और अल्पसंख्यक समुदायों में कैंसर से बचाव, समय पर जांच और टीकाकरण को लेकर बेहतर समझ विकसित करने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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