West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतदाता सूची के आंकड़े हमेशा से चर्चा का विषय रहे हैं, लेकिन इस बार शनिवार को जारी हुई अंतिम मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद सामने आए ये आंकड़े न केवल प्रशासनिक बदलाव की कहानी कहते हैं, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के गढ़ों में सियासी समीकरणों को भी हिलाने की क्षमता रखते हैं.
चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें, तो भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुख्य चुनावी आधार है, वहां से 47,111 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. यह एक बड़ी संख्या है, जिसने टीएमसी खेमे में खामोशी और विपक्ष में चर्चा को जन्म दिया है. वहीं, पूर्वी मिदनापुर जिले का नंदीग्राम क्षेत्र, जो सुवेंदु अधिकारी का किला माना जाता है, वहां से 10,994 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.
बात यहीं खत्म नहीं होती. दोनों क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं, जिनके दस्तावेज फिलहाल ‘न्यायिक प्रक्रिया’ के अधीन हैं. भवानीपुर में 14,154 और नंदीग्राम में 8,819 मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच अभी चल रही है. इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और भी बढ़ सकती है, जिससे इन दोनों क्षेत्रों में कुल वोटरों की संख्या पर काफी असर पड़ेगा.
आंकड़े सामने आते ही विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मोर्चा संभाल लिया है. उन्होंने बिना देरी किए तंज कसते हुए कहा, “भवानीपुर में अब इतने मतदाता बचे ही नहीं हैं कि वे ममता बनर्जी की जीत सुनिश्चित कर सकें.” सुवेंदु का यह बयान सीधे तौर पर चुनौती देने वाला है और राजनीतिक विश्लेषक इसे अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस की तरफ से अभी तक इन बड़े बदलावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरूनी तौर पर यह हलचल किसी बड़े चुनावी मंथन का संकेत दे रही है.
राजनीति के जानकारों के लिए यह मुद्दा 2021 के उन चुनावी पलों को ताजा कर देता है, जब ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ी थीं और उन्हें सुवेंदु अधिकारी के हाथों कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा था. उसके बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर अपनी कुर्सी सुरक्षित की थी. अब, जब उन्हीं दोनों क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में भारी फेरबदल हुआ है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका असर भविष्य के चुनावों में किस हद तक पड़ता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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