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क्या है इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी? जो बचाएगी सोनम वांगचुक की जान, जानिए क्या बोले AIIMS के डॉक्टर

Sonam Wangchuk Health: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 22 दिनों से जारी प्रदर्शन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें शनिवार (18 जुलाई) को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल में जांच के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ ने भी उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया. विशेषज्ञ ने सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल टीम की राय से सहमति जताते हुए कहा कि वांगचुक को तत्काल फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी दिए जाने की आवश्यकता है.

डॉक्टरों ने क्या दी सलाह?

डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक भोजन न लेने की वजह से शरीर में पानी और जरूरी खनिजों की कमी हो सकती है. ऐसी स्थिति में शरीर के सामान्य कार्य प्रभावित होने लगते हैं. इसलिए डॉक्टरों ने सलाह दी है कि उन्हें जल्द से जल्द शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट पहुंचाए जाएं. यह उपचार मुंह के जरिए विशेष घोल (ओरल फ्लूइड) या जरूरत पड़ने पर नसों के माध्यम से IV फ्लूइड देकर किया जा सकता है. फिलहाल AIIMS का एक डॉक्टर भी इलाज कर रही टीम के साथ जुड़कर उनकी स्थिति की लगातार निगरानी और क्लिनिकल मैनेजमेंट में सहयोग कर रहा है.

क्या होती है फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी?

फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है (What is Fluid and Electrolyte Therapy), जिसका उद्देश्य शरीर में पानी और आवश्यक खनिजों का संतुलन बनाए रखना या उसे दोबारा सामान्य करना होता है. इलेक्ट्रोलाइट्स में मुख्य रूप से सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड और अन्य जरूरी खनिज शामिल होते हैं, जो नसों, मांसपेशियों, हृदय और शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के सही संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं.

यह थेरेपी आमतौर पर गंभीर डिहाइड्रेशन, लगातार उल्टी या दस्त, अत्यधिक पसीना आने, लंबे समय तक उपवास, सर्जरी या अन्य गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों में दी जाती है. जब शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, तो कमजोरी, चक्कर आना, लो ब्लड प्रेशर, अनियमित धड़कन और अंगों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है.


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विशेषज्ञों के मुताबिक, फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी शरीर के रक्तप्रवाह ((Bloodstream) और कोशिकाओं (Cells) तक आवश्यक तरल एवं खनिज पहुंचाकर संतुलन बहाल करने में मदद करती है. यही कारण है कि गंभीर निर्जलीकरण या लंबे समय तक भोजन न लेने वाले मरीजों के लिए इसे जीवनरक्षक उपचार माना जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि सोनम वांगचुक की हालत को और बिगड़ने से रोकने के लिए यह थेरेपी जल्द शुरू करना बेहद जरूरी है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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