देश

भारत को जापान क्यों नहीं बनने देना चाहते RSS और मोहन भागवत?

Mohan Bhagwat On India Becoming Japan: हाल ही में पीएम मोदी ने जापान का दौरा किया है. इसके बाद से जापानी तकनीकी और विकास को लेकर चर्चा होने लगी है. कई लोगों का माननना है कि भारत को जापान बन जाना चाहिए. आपने अक्सर सुना होगा कि ‘दूर के ढोल सुहावने लगते हैं. कुछ यही हाल उन लोगों का है जो चाहते हैं कि भारत, जापान बन जाए. हालांकि, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) और मोहन भागवत नहीं चाहते हैं कि ऐसा हो. क्योंकि, दुनिया के सबसे उन्नत और तकनीकी रूप से विकसित देशों में से एक, जापान आज एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जो इसकी अर्थव्यवस्था और अस्तित्व को ही खतरे में डाल रहा है.

कुछ दिनों पहले मोहन भागवत दिल्ली के विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कई बातें कही. इसी में से एक बाद भारत की जनसंख्या (Mohan Bhagwat On population crisis) को लेकर थी. उनके इसी बयान को भारत को जापान बनने से रोकने को लेकर देखा जा रहा है. अब ऐसा कहा जा रहा है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भारत को जापान की राह पर चलने से बचाना चाहते हैं.

गंभीर संकट का सामना कर रहा जापान

इन दिनों जापान की जनसंख्या में गिरावट (japan population crisis) का सामना कर रहा है. पिछले साल जापान की जनसंख्या में लगभग एक मिलियन की कमी आई, जो किसी भी देश के लिए सबसे बड़ी गिरावट है. ग्रामीण क्षेत्र खाली हो रहे हैं और शहरी क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी हो रही है. जापान की जनसंख्या में पिछले साल 90,000 की कमी आई थी, जो आधुनिक इतिहास में सबसे बड़ी गिरावट है. इस गिरावट के कारण आर्थिक विकास धीमा हो रहा है, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों पर दबाव बढ़ रहा है, और समुदायों का पुनर्गठन हो रहा है.

ये भी पढ़ें: मोहन भागवत ने बताया US को जवाब देने का तरीका, मान गए इंडियन तो निकल जाएगी ट्रंप की हवा

जापान की समस्या का कारण

इस जनसंख्या संकट के पीछे कई कारण हैं. जापान में महिलाओं की स्वतंत्रता और शिक्षा में वृद्धि हुई है, लेकिन कार्यस्थल ने इसके अनुसार अनुकूल नहीं हुए हैं. लंबे कार्य घंटे, कठोर पदानुक्रम, और अपरिवर्तनीय संरचनाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ संतुलन बनाना मुश्किल बनाती हैं. इसके अलावा, पारंपरिक मातृत्व अपेक्षाएं और अधिक मांग वाली हो गई हैं.

भारत के लिए चेतावनी

हमारे लिए जापान की स्थिति एक चेतावनी है. जबकि भारत अभी भी युवा जनसंख्या वाला देश है. कई दक्षिणी राज्यों में प्रजनन दर पहले ही प्रतिस्थापन स्तर से नीचे गिर गई है. मोहन भागवत की चिंता यह है कि भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभ को पूरी तरह से लाभ उठाने से पहले खो सकता है. जापान से सबक यह है कि जनसंख्या संकट अचानक नहीं आते हैं. वे दशकों में बनते हैं, जो सामाजिक अपेक्षाओं, आर्थिक असुरक्षा, और आकांक्षाओं और वास्तविकता के बीच के अंतर से आकार लेते हैं.

ये भी पढ़ें: अमेरिकी कोर्ट ने टाइट की डोनाल्ड ट्रंप की ‘हवा’, टैरिफ को बताया अवैध; जानें अब क्या होगा?

भारत की जनसंख्या दर

इंडिया प्रजनन दर 1.9 है, जो प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से कम है. इसका मतलब है कि भारतीय महिलाएं औसतन 2.1 बच्चों के बजाय 1.9 बच्चे पैदा कर रही हैं, जो जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक है. भारत को जापान की स्थिति से सीखने की जरूरत है और अपनी जनसंख्या नीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता है. सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा ताकि भारत अपने जनसांख्यिकीय लाभ का पूरा फायदा उठा सके और जनसंख्या संकट से बच सके.

मोहन भागवत ने किया आगाह (Mohan Bhagwat Warns India)

इसी खतरे को भांपते हुए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत (RSS chief Mohan Bhagwat) ने भारतीयों को आगाह किया है कि अगर भारत इस दिशा में बढ़ता है, तो यह ‘धीमी मौत’ की ओर कदम होगा. भागवत ने भारतीय परिवारों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने का आग्रह किया है ताकि देश की जनसंख्या स्थिर बनी रहे.

ये भी पढ़ें: NYT ने खोली डोनाल्ड ट्रंप की पोल, पीएम मोदी के सामने फैलाए थे ‘हाथ’; अब हो रही जमकर किरकिरी

भारत को नहीं बनना चाहिए जापान

मोहन भागवत की यह चेतावनी सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि ‘आंखों देखा हाल’ है. जापान का अनुभव (mohan bhagwat family tree) हमें सिखाता है कि आर्थिक विकास और तकनीकी उन्नति के साथ-साथ, अगर जनसांख्यिकी संतुलन बिगड़ता है, तो देश ‘अधजल गगरी छलकत जाए’ की तरह एक खोखली समृद्धि का शिकार हो सकता है. यह संकट दशकों में बनता है, और एक बार शुरू होने के बाद इसे पलटना लगभग असंभव हो जाता है. इसी कारण RSS और मोहन भागवत नहीं चाहते हैं कि भारत जापान बन जाए.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

Recent Posts

AISA अध्यक्ष Neha Bora की याचिका HC में खारिज, शांति बनाए रखने के मुचलके पर था विवाद

दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की उस याचिका को खारिज कर दिया…

2 hours ago

सौरभ गांगुली के पर्सनालिटी राइट्स मामले में नया मोड़: दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म ‘दूसरा’ के मेकर्स को भेजा नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर सौरभ गांगुली के पर्सनालिटी राइट्स मामले में फिल्म 'दूसरा'…

2 hours ago

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कोर्ट में खिंचा मामला, राऊज एवेन्यु कोर्ट जल्द करेगा सुनवाई

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर राऊज…

2 hours ago

सीएमडी उपेन्द्र राय की पहल से दोस्तोवस्की की रचना पर हिंदी नाटक का रूस में हुआ मंचन, IAC ने भेजा आभार संदेश

कला और साहित्य के माध्यम से भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा…

3 hours ago

समुद्री व्यापार में बढ़ता दबदबा: देश के 45% से अधिक कंटेनर कार्गो पर APSEZ का रुतबा, मुंद्रा के विस्तार के साथ उठे सवालों के जवाब

गुजरात के कच्छ में स्थित मुंद्रा पोर्ट भारत के समुद्री व्यापार की रीढ़ बन चुका…

3 hours ago