सुप्रीम कोर्ट में अशोक चक्र को लेकर एक याचिका दायर की गई है. दायर याचिका में अशोक चक्र को गतिशील प्रदर्शन के लिए नीति या दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता की माने तो अशोक चक्र स्थिर जो सही नही है, इसे गतिशील होना चाहिए. हालही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था. यह अपील अजय कुमार शर्मा ने दायर की है.
हाई कोर्ट ने दायर जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि याचिका में वास्तविक जनहित का अभाव है और यह मुख्य रूप से याची के निजी प्रस्ताव से संबंधित है, जिसपर प्राधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की गई है. अजय कुमार शर्मा द्वारा दायर याचिका में राष्ट्रीय गौरव और तकनीकी नवाचार के प्रतीक के रूप में अशोक स्तंभ तंत्र के नीचे अशोक चक्र को स्थापित करने, अपनाने और प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एक प्रस्ताव भेजा था. लेकिन कोर्ट के मुताबिक शर्मा द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने स्वीकार नही किया था और ना ही कोई कार्रवाई की थी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि केवल इस आधार पर कि प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ता के प्रस्ताव पर कार्रवाई नहीं कि है, कथित रूप से जनहित में वर्तमान याचिका दायर करना याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए प्रस्ताव को जनहित में नही ठहरा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि याचिकाकर्ता को जवाब न मिलने पर कोई शिकायत है, तो इसका कारण याचिकाकर्ता का यह व्यक्तिगत मामला है और इस मामले में कोई जनहित शामिल नही है. कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार उचित उपायों का अनुसरण करने के लिए स्वतंत्र है.
बता दें कि अशोक चक्र का प्रयोग यह दिखाता है कि भारत की आजादी और समृद्धि एक निरंतर प्रगति की प्रक्रिया है, जो कभी भी थमने वाली नहीं है. यह चक्र भारत के लोकतंत्र और संविधान की प्रतीक है, क्योंकि यह स्वतंत्रता, न्याय, और समावेशिता की तरफ इशारा करता है. इसके अलावा अशोक चक्र का प्रयोग भारत के कुछ अन्य प्रतीकों में भी किया जाता है, जैसे कि भारतीय संसद के भवन के गेट पर भी अशोक चक्र को देखा जा सकता है.
यह भारतीय राजनीति और राज्य शक्ति का प्रतीक है. इसके अलावा भारत सरकार के कुछ अन्य दस्तवेज़ों और आधिकारिक प्रतीकों में भी अशोक चक्र का समावेश होता है, जो राष्ट्रीय एकता और अखंडता को दर्शाता है. इतना ही नही अशोक चक्र को भारतीय न्याय व्यवस्था के प्रतीक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. भारतीय अदालतों के प्रतीक में इस चक्र का इस्तेमाल इसके न्याय के मूल सिद्धांतों को समर्पित किया गया है. यह न्याय की निरंतरता और निष्पक्षता को दिखाता है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
GST Reform Compliance Refund Process: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि GST सुधारों का अगला…
नंदीग्राम उपचुनाव से कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट के…
हीरो विडा इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री में अगस्त में 108% का उछाल आया है. मात्र…
Natarajasana Preparatory Yoga Poses: नटराजासन एक कठिन बैलेंसिंग और बैकबेंड योगासन है, जिसे करने से…
समाधान अभियान के वार्षिक दिवस 2026 में जारी अध्ययन के अनुसार, अधिकांश लोग पॉक्सो शब्द…
साल 2026 का मेडिसिन नोबेल पुरस्कार कार्ल डाइसरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नागेल को ऑप्टोजेनेटिक्स…