सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल किसी भी संरचनात्मक बदलाव पर विचार नहीं किया जाएगा. सुनवाई में वरिष्ठ वकील श्याम दिवान ने स्थिति रिपोर्ट देर से मिलने का मुद्दा उठाया. वहीं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि उच्चाधिकार समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार काम कर रही है. इससे पहले मंदिर प्रबंधन और दर्शन समय से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तृत बहस हुई थी, जिसमें भीड़ नियंत्रण और परंपराओं को लेकर अलग-अलग दलीलें रखी गईं.
वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर न्यास अध्यादेश 2025 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 2 सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. कोर्ट ने स्थिति रिपोर्ट सभी पक्षों को सौंपे जाने तक मामले की सुनवाई को टाल दिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है.
मामले की सुनवाई के दौरान प्रबंधन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दिवान ने कोर्ट को बताया कि हमें कल देर रात स्थिति रिपोर्ट दी गई है. क्या इसपर दो सप्ताह बाद विचार किया जा सकता है. सीजेआई ने कहा कि हम वर्तमान व्यवस्था में कोई संरचनात्मक परिवर्तन करने के इच्छुक नहीं है. वही एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि उच्चाधिकार समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्य करना चाहती है, हमारा कोई विरोधी रुख नही है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के संरचनात्मक देख रेख के लिए 12 सदस्यीय उच्चाधिकार समिति का गठन किया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में यह कमेटी गठित की गई है या नहीं. पिछली सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि लोग भगवान को भी आराम नहीं करने देते.
मामले की सुनवाई के दौरान मैनेजमेंट कमेटी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा था कि अदालत को मुख्य तौर पर चार पहलुओं पर गौर करना चाहिए. दिवान ने कहा था कि दर्शन का समय परंपरा से जुड़ा है, पवित्र है, और सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए जरूरी है. दिवान ने कहा था कि दर्शन के समय में बदलाव हुआ है, यह अनुष्ठानों का एक अभिन्न अंग है, इन समयों को बहुत महत्व दिया जाता है. इसलिए अन्य मंदिरों के विपरीत, जिनमें लचीलेपन का तत्व हो सकता है.
सीजेआई ने कहा था कि अगर दर्शन का समय बढ़ाया जाता है तो क्या समस्या है? दीवान ने कहा था कि इसमें संवेदनशीलता की आवश्यकता है. ऐतिहासिक रूप से दर्शन के लिए निर्धारित समय की सख्ती से पालन किया जाता रहा है. सीजेआई ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह वह समय है, जब तथाकथित धनी लोग, जो भारी रकम चुकाते हैं. उन्हें अनुष्ठान करने की अनुमति दी जाती है.
यह वह समय है जब वे हर तरह की प्रथाओं में लिप्त होते है, वे उन लोगों को आमंत्रित करते हैं जो भारी रकम चुका सकते हैं.
दीवान ने कहा था कि यह आशंका सही है, लेकिन यह एक अलग मुद्दा है. सीजेआई ने कहा था कि दूसरा मसला, दैनिक पूजा की प्रथा को समाप्त करना. उन्होंने कहा था कि मान लीजिए कि मूल समय में 10-15 हजार की कमी आती है, लेकिन कई हजार की कमी से क्या फर्क पड़ेगा? दीवान ने कहा था कि हम भगदड़ जैसी स्थिति नहीं चाहते, हमें श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नियंत्रण चाहिए. यह एक अलग मुद्दा है.
-भारत एक्सप्रेस
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