Fake Bank Guarantee Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलायंस पावर लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी अशोक कुमार पाल की ओर से दायर जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट 10 जून को फैसला सुनाएगा. अशोक पाल को 68 करोड़ रुपए की कथित बैंक गारंटी से संबंधित मामले में लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने गिरफ्तार किया है.
अशोक पाल की यह गिरफ्तारी 2024 में हुई एक एफआईआर के आधार पर की गई है, जिसमें सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को फर्जी गारंटी दी गई थी. इसके अलावे अशोक पाल पर करोड़ों रुपए के फर्जी ट्रांसपोर्ट बिलों के जरिए धन निकालने का भी आरोप है. अशोक कुमार पाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कोर्ट को बताया कि 8 महीने से अधिक समय से हिरासत में है.
उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय भले ही पीएमएलए की धारा 45 के तहत जमानत पर प्रतिबंधों का हवाला दे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है. कि 21 इन प्रतिबंधों पर वरीयता रखता है. उन्होंने कहा कि अगस्त 2025 में ईडी ने पाल को पूछताछ के लिए बुलाया, जिसमें उन्होंने पूरा सहयोग किया और उनका बयान भी दर्ज किया गया.
बाद में अक्टूबर 2025 में एक और समन जारी किया गया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया और तब से वह न्यायिक हिरासत में है. उन्होंने यह भी बताया कि गिरफ्तारी के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हो चुका है. उन्होंने यह भी कहा कि पाल को व्हाट्सएप चैट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है.
वही ईडी की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि फर्जी बैंक गारंटी का इस्तेमाल करने का प्रयास भी पीएमएलए के तहत अपराध है और इस मामले में ईडी के अधिकार क्षेत्र पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि आरोपी की आठ महीने की हिरासत को लंबा समय नहीं माना जा सकता खासकर पीएमएलए की धारा 45 के तहत लागू कड़ें प्रावधानों को देखते हुए बताया जा रहा है कि पाल ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए भुगतान की फाइलें मंजूर की, ताकि कंपनी की आधिकारिक प्रणाली को दरकिनार किया जा सके. इतना ही नहीं, जांच में यह भी पता चला है कि उन्होंने जिन बैंकों के नाम से गारंटी दी, असल में वे उस देश में मौजूद है.
हाल ही में ईडी ने अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए बुलाया था. ईडी के मुताबिक RHFL और RCFL की ओर से 12524 करोड़ रुपये के लोन दिए गए. इनमें से ज्यादातर लोन रिलायंस अनिल अंबानी की कंपनी को दिया गया. इनमें से 6931 करोड़ रुपए का लोन नॉन परफॉर्मिंग असेट्स घोषित किया गया है.
दरअसल रिलायंस पावर लिमिटेड एक सूचीबद्ध कंपनी हैं और इसमें 75 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी सार्वजनिक निवेशकों की है. कंपनी के बोर्ड प्रस्ताव के तहत अशोक कुमार पाल को टेंडर से जुड़े सभी दस्तवेज़ों को अंतिम रूप देने, स्वीकृत करने और हस्ताक्षर करने का अधिकार दिया गया था.
-भारत एक्सप्रेस
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