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DUSU Election: DUSU चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और DU को भेजा नोटिस

DUSU Election: दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में महिला छात्रों को पचास प्रतिशत आरक्षण देने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली विश्वविद्यालय और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील की दलीलों को सुनने के बाद यह नोटिस जारी किया है.

कोर्ट नवंबर में मामले में अगली सुनवाई करेगा. यह जनहित याचिका शबाना हुसैन ने दायर की है. दायर याचिका में कहा गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में एक लाख से अधिक छात्र पढ़ते है और इनमें बड़ी संख्या महिला छात्रों की है. इसके बावजूद छात्रसंघों के निर्वार्चित पदों पर महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम है. दायर याचिका में कहा गया है कि छात्रसंघों में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी नहीं होने के कारण महिला छात्रों से जुड़े कई अहम मुद्दों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता.

छात्राओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न के मुद्दे पर कोर्ट में सुनवाई

इनमें यौन उत्पीड़न, छात्राओं की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे शामिल है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि चुनाव में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण से चुनाव के दौरान होने वाली हिंसा को कम करने में मदद मिल सकती है. इसपर कोर्ट ने पूछा कि क्या यह माना जा रहा है कि महिलाओं को आरक्षण देने से हिंसा कम हो जाएगी और इसका आधार यह है कि महिलाएं कम हिंसक होती हैं.

लोकसभा में 33% महिला आरक्षण का जिक्र

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि संसद द्वारा लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटे आरक्षित करने वाले कानून का भी हवाला दिया. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की बार एसोसिएशनों मे महिलाओं के लिए उठाए गए आरक्षण संबंधी कदमों का भी उल्लेख किया गया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि DUSU चुनाव में महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षण का कानूनी अधिकार आखिर किस प्रावधान के तहत बनता है.

कोर्ट ने पूछा कि क्या दिल्ली विश्वविद्यालय अधिनियम में छात्रसंघ चुनावों में आरक्षण का कोई प्रावधान है और अदालत के पास ऐसा अधिकार बनाने का कानूनी आधार क्या है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि वो अधिकारों की रक्षा कर सकती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या वह खुद कोई नया अधिकार बना सकती है और यदि ऐसा अधिकार है तो वह किस कानून या प्रावधान से निकलता है.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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