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‘आप लोकतांत्रिक रूप से चुने गए चेयरमैन नहीं, सिर्फ प्रो-टेम चेयरपर्सन’; BCI प्रमुख पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन मिश्रा को अंतरिम राहत देते हुए मौजूदा कमेटी को चुनाव होने तक काम जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन उसके अधिकारों को सीमित कर दिया.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट ने भले ही मामूली राहत दे दी हो, लेकिन कोर्ट ने मिश्रा के पर को भी कतर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मनन मिश्रा के कार्यप्रणाली को लेकर नई कमेटी की गठन के मांग को खारिज कर दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्य बार काउंसिल के चुनाव पहले ही हो चुके है और उनके गठन के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नए पदाधिकारियों का भी चुनाव किया जाएगा. ऐसे में नई कमेटी गठित करने की आवश्यकता नही है. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि चुनाव होने तक मौजूदा कमेटी काम करती रहेगी. कोर्ट ने कमेटी को नीतिगत फैसले पर रोक लगा दिया है. कोर्ट ने कहा कि अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सहमति के बिना कोई भी नीतिगत फैसला नही लिया जाएगा. अदालत ने राज्य बार काउंसिल के गठन और वहां पदाधिकारियों के चुनाव के लिए पांच सप्ताह का समय दे दिया है.

इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों का चुनाव कराया जाएगा.

 नियमों के तहत BCI पदाधिकारियों का कार्यकाल कितना?- सुप्रीम कोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पूछा कि नियमों के अनुसार बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और वीसी का कार्यकाल कितना होता है. उन्होंने कहा कि अगर नियम लागू होता है तो यह 2027 से आगे नहीं बढ़ सकता. नियम के अनुसार अधिसूचना किसी कानून को ओवरराइड नहीं कर सकता और न ही किसी संस्था को अतिरिक्त कार्यकाल देने का अधिकार दे सकता है.वही सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि राज्य बार काउंसिल का चुनाव हो चुका है. वे अपने प्रतिनिधि चुनेंगे. प्रतिनिधि आगे चुनाग करेंगे. इसपर वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि लेकिन बीसीआई चेयरमैन बने रहेंगे.

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमें नहीं लगता कि आपको अंतरिम व्यवस्था के बारे में कोई चिंता करनी चाहिए. सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस कोर्ट के कुछ पूर्व जजों और सीजे को पूरा श्रेय जाता है. वे हर राज्य में निगरानी कर सकते थे.उनकी देखरेख में चुनाव हो सकते थे.. उन्होंने कहा कि शिकायतें तो होगी ही.लेकिन कोई पक्षपात वगैरह का आरोप नही लगा सकता.

हमें लगता है कि जब हम सीजे से 2 सप्ताह में को-ऑप्शन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहेंगे, तो ज्यादातर मुद्दे हल हो जाएंगे.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग से सवाल, पूछा- वोटों की गिनती के लिए ‘टोटलाइजर मशीन’ के इस्तेमाल में क्या दिक्कत है?

-भारत एक्सप्रेस



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