दिल्ली हाई कोर्ट ने 26 हफ्ते की गर्भवती नाबालिग लड़की को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने एम्स द्वारा गठित डॉक्टरों की पैनल की रिपोर्ट को देखने के बाद यह अंतरिम दी है.
जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने यह आदेश दिया है. यौन शोषण के कारण नाबालिग गर्भवती हो गई थी. जिसके बाद नाबालिग ने अपनी मां के माध्यम से दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी। जिस याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एम्स) को एक मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया था। साथ कोर्ट ने पीड़िता की जांच कर मेडिकल रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया था.
दरअसल, नाबालिग इस गर्भ से छुटकारा पाना चाहती थी. जिसको लेकर उसने अपनी मां के माध्यम से कोर्ट में याचिका दायर कर इसकी अनुमति मांगी थी. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अवनीश मधुकर ने कहा गया था कि नाबालिग यौन उत्पीड़न के चलते गर्भवती हो गई है. जिस कारण वह मानसिक पीड़ा से गुजर रही है.
इसलिए इस तरह के गर्भावस्था से होने वाली पीड़ा को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेंनेन्सी एक्ट 1971 की धारा 3(2)(बी) के अनुसार पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चोट के रूप में माना जाना चाहिए. जिसके बाद कोर्ट में मौजूद स्टैंडिंग काउंसिल संजय लैप ने कोर्ट को बताया कि इसको लेकर एम्स बोर्ड ने पहले ही मेडिकल बोर्ड का गठन कर दिया है.