लीगल

विदेशी अदालत का फैसला आने के बाद भारत में दोबारा कानूनी प्रक्रिया नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने तलाक के मामले में एक बड़ा फैसला दिया है. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अपने अहम फैसले में कहा है कि विदेशी अदालत का फैसला आने बाद भारत में दोबारा कानूनी प्रक्रिया नहीं चलाई जा सकती है. साथ ही कोर्ट ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने इसे कानूनी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल बताया है.

आर्थिक समझौता पहले ही स्वीकार

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित महिला ने अमेरिका की अदालत से तलाक की डिक्री और आर्थिक समझौता पहले ही स्वीकार कर लिया था. इसके बावजूद महिला ने भारत में भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत आपराधिक मामला जारी रखा था.

कोर्ट ने कहा कि महिला ने अपनी मर्जी से यूएस कोर्ट में हिस्सा लिया, सेटलमेंट की रकम ली और तलाक का आदेश हासिल किया, इसलिए भारत में भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत आपराधिक मामला जारी रखना सही नहीं हैं.

बता दें कि यह मामला उस समय नया मोड़ ले लिया था, जब मामले की सुनवाई के दौरान पति की ओर से हाई कोर्ट के समक्ष वह दस्तावेज पेश किया गया, जिसमें महिला ने पति से अमेरिका की अदालत में तलाक लेते हुए कहा था कि उनके बीच अब सबकुछ सुलझ गया है.

भारत में FIR बरकरार रखना गतल

दिल्ली हाई कोर्ट ने ये भी कहा कि महिला उन्हीं वैवाहिक विवादों को भारत में आपराधिक मुकदमें के माध्यम से दोबारा नहीं उठा सकती. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वैवाहिक विवाद में संपत्ति समझौता जिंदगी में आगे बढ़ने का इरादा दर्शाता है. जब अमेरिका कोर्ट में दोनों पक्षों ने सहमति दी थी कि उनके सभी विवाद सुलझ चुके है, तो भारत में एफआईआर को बरकरार रखना गलत है.

गौरतलब है कि महिला का विवाह जुलाई 2017 में दिल्ली में हुआ था. इसके बाद वह पति के साथ अमेरिका चली गई थी. दो साल बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया. 17 मई 2019 को पति ने अमेरिका की अदालत में तलाक याचिका दायर की. 27 मई 2019 को महिला ने जवाबी कार्रवाई में यूएस पुलिस को घरेलू हिंसा की शिकायत दी.

अमेरिकी पुलिस ने पति को पाया पीड़ित

मामले में अमेरिकी पुलिस ने जांच के बाद पति को पीड़ित पाया और पत्नी को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार कर लिया. हालांकि पति ने पत्नी पर कोई आरोप नहीं लगाया, इसलिए पुलिस ने उसे रिहा कर दिया. बाद में महिला ने घरेलू हिंसा के तहत मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन आरोप साबित नहीं कर पाई.

इसके बाद उसने दिल्ली में घरेलू हिंसा के तहत मुकदमा दर्ज किया. लेकिन इसी बीच जनवरी 2020 में अमेरिकी अदालत ने दोनों को आपसी सहमति से तलाक दे दिया और महिला ने भरण पोषण की 11 लाख की राशि को स्वीकार कर लिया.

ये भी पढ़ें: देश भर की अदालतों में ‘लंबित मुकदमों’ का अंबार: भारी बजट के बाद भी ‘सुस्त’ क्यों है न्याय की रफ्तार?

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

ब्रज की आध्यात्मिक विरासत और विकास पर केंद्रित: बरसाना में ‘ललिता कुंज’ टाउनशिप का शुभारंभ, सुनील शेट्टी ने की शिरकत

नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में बॉलीवुड अभिनेता ने ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक और…

3 hours ago

दिल्ली-NCR सहित कांपी उत्तर भारत की धरती, महसूस हुए भूकंप के झटके

दिल्ली-NCR और पूरे उत्तर भारत में रात 10:23 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए.…

3 hours ago

काशी में ‘पाकिस्तानेश्वर’ महादेव मंदिर का बदला नाम, सिंधी समाज के विरोध के बाद अब कहलाएंगे ‘सिंधु गंगेश्वर’

वाराणसी के छोटी शीतला घाट स्थित शिव मंदिर का नाम 'पाकिस्तानेश्वर' से बदलकर 'सिंधु गंगेश्वर…

4 hours ago

आसमान में तैनात होगा भारत का स्वदेशी ‘जासूस’, DRDO ने HAPS एयरशिप का किया कामयाब ट्रायल

DRDO ने 21 किमी की ऊंचाई पर 'हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम' (HAPS) का सफल परीक्षण…

4 hours ago

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम केविन रुड बोले- वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत, पीएम मोदी के हुए मुरीद

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम केविन रुड ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के मन में पीएम…

5 hours ago

योगी सरकार का सोलर कमाल: 2,942 मेगावाट पहुंची रूफटॉप क्षमता, ‘PM सूर्य घर योजना’ में उत्तर प्रदेश नंबर-1

उत्तर प्रदेश में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' से 2,942 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर लग…

5 hours ago