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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय पर 50 हजार रुपये का लगाया जुर्माना

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली विश्वविद्यालय पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. दिल्ली विश्वविद्यालय पर गलत जानकारी देकर हलफनामा दाखिल करने का आरोप है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रेणु भटनागर ने कहा कि चेतावनी देने के बावजूद अपने ही बातों पर अड़े रहे जबकि दस्तावेज कुछ और कहती है. कोर्ट ने यह कहते हुए विश्वविद्यालय से हर्जाना की राशि चार सप्ताह में जमा करने का आदेश दिया है.

यह मामला श्री गुरु तेगबहादुर खालसा कॉलेज के एक अवकाश प्राप्त प्रोफेसर रविंदर नारायण मिश्रा की पेंशन निर्धारण से संबंधित है. उन्होने कहा था कि उनकी नियुक्ति 26 अगस्त 2004 को लेक्चरर के पद पर हुई थी, जबकि विश्वविद्यालय 24 अप्रैल 2006 को बता रहा है. इसलिए विश्वविद्यालय से कहा जाए कि इसकी नियुक्ति वर्ष 2004 मानते हुए नए पेंशन योजना के तहत उसका पेंशन निर्धारित किया जाए.

सिंगल बेंच ने प्रोफेसर की नियुक्ति अगस्त 2004 मानते हुए विश्वविद्यालय से उनकी कार्यावधि तय करने को कहा था. उस आदेश को दिल्ली विश्वविद्यालय ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी और कहा था कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 9 अगस्त 2005 के एक विज्ञापन के आधार पर 24 अप्रैल 2006 को हुई है.

डिवीजन बेंच के समक्ष पेश दस्तवेज़ों का मुआयना करने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति एक प्रोफेसर के अवकाश पर चले जाने के दिन से हुई थी और उससे कहा गया था कि उक्त पद के रिक्त होने पर उसकी नियुक्ति मान ली जाएगी.

वह प्रोफेसर ने बाद में त्यागपत्र दे दिया और याचिकाकर्ता की नियुक्ति 26 अगस्त 2004 मान ली थी. फिर भी विश्वविद्यालय ने कहा था कि नियुक्ति अप्रैल 2006 में हुई है. इसे देखते हुए कोर्ट ने विश्वविद्यालय पर यह हर्जाना लगाया है.


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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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