लीगल

दिल्ली में 15 दिनों में 800 से अधिक लोग लापता: हाई कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस से मांगा जवाब

Delhi Missing Persons: देश की राजधानी में बड़ी संख्या में लोगों के गायब होने के मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने महज 15 दिनों के भीतर 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की घटना पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने इन सभी पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

क्या है पूरा मामला?

यह आदेश जयिता देव सरकार की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर आया है. याचिका में दावा किया गया है कि इस साल के शुरुआती 15 दिनों में ही 800 से अधिक लोग गायब हो गए हैं. पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह स्पष्ट करना चाहा था कि क्या ऐसा ही कोई मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि उनकी जानकारी में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में ऐसी कोई याचिका लंबित नहीं है.

प्रोटोकॉल और SOP के उल्लंघन का आरोप

दायर याचिका में प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता का आरोप है कि:

गुमशुदा व्यक्तियों को ढूंढने के लिए निर्धारित बाध्यकारी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है.

स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की अनदेखी की जा रही है.

यही मुख्य कारण है कि शहर में बड़े पैमाने पर लोग लगातार गायब हो रहे हैं और उनकी तलाश प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है.

दिल्ली पुलिस का पक्ष और आंकड़ों पर स्पष्टीकरण

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन खबरों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. पुलिस का कहना है कि लापता बच्चों और लोगों के मामलों में अचानक बढ़ोतरी की खबरें महज अफवाह हैं. पुलिस के अनुसार:

आधिकारिक आंकड़े पिछले एक दशक से लगभग स्थिर बने हुए हैं.

हालिया आंकड़ों के मुताबिक, दर्ज मामलों में से 235 लोगों का पता लगाया जा चुका है, जबकि 572 लोग अभी भी लापता हैं.

पुलिस ने चेतावनी दी है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

राजनीतिक प्रतिक्रिया

हैरानी की बात यह है कि इस मुद्दे पर विपक्षी दल आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी पुलिस के दावों का समर्थन किया है. जहां एक ओर याचिकाकर्ता आंकड़ों को लेकर चिंता जता रहे हैं, वहीं प्रशासन और पुलिस इसे सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं.

अब सभी की निगाहें चार सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जब केंद्र और दिल्ली सरकार को कोर्ट के समक्ष अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

UP फतह के लिए BJP-RSS का मास्टरस्ट्रोक, 80 हजार बैठकों के पीछे क्या है प्लान?

UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में बीजेपी और आरएसएस…

11 minutes ago

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में जियो का बड़ा विजन, AI से बदलेगी वॉयस-डेटा सर्विस; 6G में दुनिया को लीड करने का दावा

India Mobile Congress 2026: इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी…

23 minutes ago

रांची में चौक के नाम पर सियासी बवाल, BJP ने बदला नाम तो कांग्रेस ने रातों-रात उखाड़ा बोर्ड

रांची के हरमू स्थित जनरल ए.एस. वैद्य चौक का नाम बदलने को लेकर बीजेपी और…

37 minutes ago

हर महीने 9 तारीख को कांपेगा उत्तराखंड? बजेगा भूकंप का अलार्म, जानिए पूरा प्लान

उत्तराखंड में अब हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे भूकंप का सायरन…

1 hour ago

शारदीय नवरात्रि के व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी?

Navratri Vrat Rules: शारदीय नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक माता की पूजा-अर्चना और व्रत…

1 hour ago

‘तारीख पर तारीख’ से पाकिस्तान में टूटा सब्र, कोर्ट में ही वकील ने कर दिया बड़ा कांड

Pakistan Court Incident: पाकिस्तान के सिंध हाईकोर्ट की हैदराबाद सर्किट बेंच में 11 महीने से…

1 hour ago