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विवादास्पद कार्टून बनाने वाले इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिन में माफी मांगने को कहा

विवादास्पद कार्टून बनाने वाले इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह माफी मांगने के लिए तैयार है. जिसपर कोर्ट ने सहमति जताते हुए कहा कि 10 दिन में फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर माफीनामा प्रकाशित करें.

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने यह आदेश दिया है. साथ नही कोर्ट के गिरफ्तारी पर लगी रोक को अगले आदेश तक बरकरार रखा है.

मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन ने कहा कि जांच जारी रहने के कारण पोस्ट को हटाया नही जाना चाहिए. एएसजी नटराजन ने यह भी कहा कि माफीनामा सोशल मीडिया पर इस वचन के साथ प्रकाशित किया जाए कि वह दोबारा ऐसा नहीं करेंगे और जांच में सहयोग करेंगे.

कार्टून के नीचे की टिप्पणी किसी और ने जोड़ी

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता 50 साल के है, फिर भी परिपक्वता नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि कार्टून 2021 का है, जब कोविड वैक्सीन को लेकर भ्रम फैला हुआ था. यह सिर्फ एक व्यंग्य था, किसी प्रकार की कानून व्यवस्था की स्थिति नही बिगड़ी. कार्टून के नीचे की टिप्पणियां किसी और ने जोड़ी है.

हेमंत मालवीय पर विवादास्पद कार्टून बनाने का आरोप

हेमंत मालवीय पर विवादास्पद कार्टून बनाने का आरोप है. हाई कोर्ट मालवीय को यह कहते हुए अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था कि मालवीय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है और उन्हें विवादित कैरिकेचर बनाते समय विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए था.

हेमंत मालवीय ने अपनी फेसबुक पेज पर कुछ कार्टून, कमेंट, फोटो और वीडियो पोस्ट किए थे. इनमें भगवान शिव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस कार्यकर्ता विनय जोशी ने लसूड़िया थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. उनके अनुसार हेमंत मालवीय द्वारा पोस्ट किया गया कार्टून न केवल प्रधानमंत्री और संघ के प्रति आपत्तिजनक है, बल्कि इसका उद्देश्य हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुचाना भी है.

उन्होंने इस सामग्री को अश्लील और भड़काऊ करार दिया, जिसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बताया गया. बता दें कि मालवीय अपने कार्टूनों के जरिये राजनीतिक मुद्दों पर टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं. यह पहली बार नहीं है जब उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया हो.

इससे पहले वर्ष 2022 में उन पर उत्तराखंड पुलिस ने योग गुरु रामदेव के कथित अश्लील पोस्टर बनाने के आरोप में केस दर्ज किया गया था. दिसंबर 2022 में पीएम मोदी की मां की मौत के बाद कथित रूप से अपमानजनक बयान देने के लिए इंदौर पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था.

-भारत एक्सप्रेस
गोपाल कृष्ण

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