दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) की कर्मचारी बनकर धोखाधड़ी करने के मामले में आरोपी महिला को अग्रिम जमानत दे दिया है.कोर्ट ने कहा कि कुछ दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि जरूरी है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ
प्रताप सिंह लालेर ने अपने फैसले में कहा कि ऋण समझौता के साथ रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य दस्तवेज़ों की प्रमाणिकता की पुष्टि होनी अभी बाकी है.
लिहाजा अदालत का मानना है कि आवेदक फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के परिणाम प्राप्त होने तक जमानत के हकदार है. उन्होंने यह कहते हुए आरोपी इंदाणी दास गुप्ता को अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है.
इंद्राणी के खिलाफ इंद्रपुरी थाने में धोखाधडी और जालसाजी समेत आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. जांच अधिकारी (आईओ) ने कहा है कि इंद्राणी ने एमसीए के चालान, मुहर और एक अधिकारी तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के हस्ताक्षरों के साथ जालसाजी भी थी.
महिला के वकील सुमित गहलोत ने कहा था कि यह मामला किसी षड्यंत्र के बजाए दीवानी मौद्रिक विवाद पर आधारित है.
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-भारत एक्सप्रेस
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