नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी ने अपनी दलीलें पूरी कर ली है. अब सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तरफ से 4 जुलाई को दलीलें रखी जाएगी. राऊज एवेन्यु कोर्ट ने न्यायाधीश डॉक्टर विशाल गोगने की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान ईडी ने यंग इंडियन कंपनी पर बड़े आरोप लगाए है. सुनवाई के दौरान ईडी ने बताया कि यह एक यंग इंडियन का क्लासिक मामला हैं, क्योंकि यंग इंडियन गांधी परिवार की प्रॉक्सी कंपनी हैं.
यंग इंडियन एक कागजी कंपनी है, जिसे केवल इस उद्देश्य से बनाया गया था कि एजेएल और उसकी संपत्तियों का अधिग्रहण किया जा सके. इसका अंतिम लाभ और नियंत्रण आरोपियों के पास ही रहे, यही योजना थी. यंग इंडियन को एक विशेष उद्देश्य के रूप में इस्तेमाल किया गया. इसका मकसद मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित गतिविधियों को अंजाम देना था. एएसजी एसवी राजू ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी पीएमएलए की धारा 70 के तहत पूरी तरह से जिम्मेदार है.
गांधी परिवार के एजेएल के हजारों शेयरधारकों को उनके अधिकारियों से वंचित किया, उनके शेयरों को नगण्य बना दिया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि जब एजेएल के वे शेयरधारक, जिन्हें नुकसान हुआ है अगर वो सामने नही आ रहे हैं तो मुकदमा कैसे चलेगा. एएसजी एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि गांधी परिवार ही यंग इंडियन के प्रभावी रूप से 100 % शेयरधारक हैं, क्योंकि अन्य शेयरधारकों की मौत हो चुकी है और उनके शेयरों का हस्तांतरण नहीं हुआ है.
एएसजी राजू ने कहा कि एजीएल से यंग इंडियन को शेयरों का स्थानांतरण केवल सात शेयरधारकों द्वारा किया गया फैसला था. यह धोखाधड़ीपूर्ण स्थानांतरण एजीएल के हजारों अन्य शेयरधारकों को भारी नुकसान पहुंचाया गया. इससे पहले सुनवाई के दौरान एएसजी एसवी राजू ने बड़ा संकेत देते हुए कहा था कि आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी भी ईडी की जांच के दायरे में आ सकती है. उन्होंने कहा था कि इस संभावना से इनकार नही किया जा सकता है.
एएसजी राजू ने कहा था कि कांग्रेस को इस मामले में अभी तक पार्टी नही बनाया गया है. अगर कांग्रेस पार्टी को इस मामले में आरोपी बनाया गया तो सोनिया गांधी, राहुल गांधी की भूमिका उनके खिलाफ पीएमएलए की धारा 70 के तहत मजबूत करने में सहायक होगा. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि ईडी बिना पुख्ता सबूत के ऐसा कदम नही उठाएगी. उन्होंने कहा था कि लोग सालों से फर्जी अग्रिम किराया दे रहे थे. किराए की रसीद फर्जी थी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के कहने पर ही एजीएल को विज्ञापन का पैसा दिया गया.
ईडी ने कहा था कि इस तरह की धोखाधड़ी से हुई कोई भी इनकम अपराध की आय है. एएसजी राजू ने कहा था कि एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड नाम की एक कंपनी थी, जो मुनाफा नहीं कमा रही थी, लेकिन उसके पास करीब 2000 करोड़ रुपए की संपत्तियां थी. उसे अपने दिन प्रतिदिन के खर्च चलाने में कठिनाई हो रही थी. उन्होंने दावा किया था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने ही 2000 करोड़ की संपत्ति हड़पने की साजिश रची थी.
एएसजी राजू ने यह भी कहा था कि इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही मुख्य आरोपी है. उन्होंने कहा था कि यंग इंडिया बनाने की साजिश रची गई थी. जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के 76%शेयर थे, ताकि कांग्रेस से लिए गए 90 करोड़ रुपए के कर्ज के लिए 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति को हड़पी जा सके.
-भारत एक्सप्रेस
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