अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर कर चुनावी वादों के वित्तीय प्रभाव, मुफ्त की रेवड़ियों पर रोक और घोषणापत्रों के लिए एक निश्चित प्रारूप लागू करने की मांग की है. (PC: भारत एक्सप्रेस)
नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) आगामी 19 अगस्त 2026 को अगली महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों से जुड़ी अपनी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट और प्रस्तावों का हलफनामा (Affidavit) सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है. इस हलफनामे का संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने सभी याचिकाकर्ताओं को सरकार द्वारा प्रस्तावित सुधारों पर अपने-अपने लिखित सुझाव दाखिल करने का निर्देश दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की दो सदस्यीय खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सरकार के हलफनामे को अभी औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर नहीं लिया गया था क्योंकि इस पर गहन विचार-विमर्श करने के लिए कई तकनीकी व प्रशासनिक बिंदु शामिल हैं.
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं को पूरी तरह रोकने और परीक्षा प्रणाली की सभी खामियों को दूर करने के लिए नीट (NEET) के आयोजन के तरीके में दूरगामी और व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं. CBT मोड और JEE की तर्ज पर 2-स्तरीय परीक्षा का प्रस्ताव रखा गया है.
पिछली सुनवाई का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार और एनटीए को पेपर लीक के बाद सुधारों की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया था. अदालत ने
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जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने पिछली सुनवाई में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि पेपर लीक के बाद सुरक्षा के लिए ‘भारतीय वायु सेना’ (IAF) की तैनाती केवल एक तात्कालिक/कामचलाऊ उपाय था और यह कोई स्थायी समाधान नहीं हो सकता. अदालत ने केंद्र से उम्मीदवारों के सुरक्षित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (सत्यापन) के लिए ‘डिजीयात्रा’ (DigiYatra) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने के प्रस्तावों और डेटा सुरक्षा के उपायों पर भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा था. अब 19 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर देश भर के लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों की नजरें टिकी हैं.
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