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हजारों घर खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, अब मिल सकेगी फ्लैट की रजिस्ट्री; बिल्डर को लगाई फटकार

Parshvnath Developers: अपने सपनों का घर पाने के लिए सालों से इंतजार कर रहे पार्श्वनाथ डेवलपर्स के हजारों खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने घर खरीदारों के पक्ष में अहम आदेश देते हुए कन्वेयन्स डीड यानी फ्लैट की रजिस्ट्री और मालिकाना हक ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी है. हालांकि, इसके लिए आवंटन का सत्यापन जरूरी होगा. कोर्ट ने साफ किया है कि इस अनुमति के जरिए किसी तीसरे पक्ष का अधिकार नहीं बनाया जा सकता.

घर खरीदारों को रजिस्ट्री कराने की मिली अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जिन खरीदारों का आवंटन सत्यापित हो जाएगा, उनके पक्ष में कन्वेयन्स डीड की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है. इससे उन हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से अपने फ्लैट का मालिकाना हक पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
इसके अलावा कोर्ट ने बिजली बिल और कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए कंपनी के खातों को फ्रीज करने के अपने पुराने आदेश में भी ढील दी है. अदालत ने ऋण देने वाले वित्तीय संस्थानों को संकल्प पेशेवर के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है.

किसी एक समाधान से पूरी नहीं होगी समस्या

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पार्श्वनाथ के अलग-अलग प्रोजेक्ट्स की स्थिति पर भी चिंता जताई. अदालत ने कहा कि कुछ परियोजनाओं का निर्माण 70 से 90 फीसदी तक पूरा हो चुका है, जबकि कुछ में बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं. वहीं, कई प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं या केवल कागजों पर मौजूद हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी परियोजनाओं के लिए एक जैसा समाधान लागू नहीं किया जा सकता. हर प्रोजेक्ट की स्थिति और घर खरीदारों की परेशानियों को अलग-अलग ध्यान में रखना होगा.

500 करोड़ के प्रस्ताव पर खरीदारों को आपत्ति

पार्श्वनाथ डेवलपर्स ने रिफंड और परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, घर खरीदारों का कहना है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कम से कम 2,000 करोड़ रुपये की जरूरत है.

बिल्डर को पहले भी लगाई थी कड़ी फटकार

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों के अधिकारों की अनदेखी करने पर पार्श्वनाथ डेवलपर्स को कड़ी फटकार लगाई थी. अदालत ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स लिमिटेड, पार्श्वनाथ हिस्सा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उनके निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज करने का आदेश दिया था. लंबे समय से कब्जे का इंतजार कर रहे वरिष्ठ नागरिकों की परेशानी को देखते हुए कंपनी के नेतृत्व के खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किया गया था.

घर खरीदारों के लिए बन सकता है अलग समाधान

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने सुझाव दिया कि दिवालिया प्रक्रिया (IBC) के ढांचे को बरकरार रखते हुए घर खरीदारों को समिति के सामने स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने का अधिकार दिया जाना चाहिए. अब सुप्रीम कोर्ट इस बात की भी जांच कर रहा है कि अदालत की ओर से नियुक्त समिति की पहुंच केवल दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) में शामिल संपत्तियों तक सीमित रहेगी या वह पार्श्वनाथ की अन्य कंपनियों की संपत्तियों पर भी विचार कर सकेगी. इससे लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे हजारों खरीदारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं.

भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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