सुप्रीम कोर्ट पेगासस स्पाइवेयर से संबंधित याचिकाओं को 30 जुलाई 2025 को सुनवाई करेगा.जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उन लोगों से 2 सप्ताह में जवाब मांगा है, जो इससे प्रभावित है. कोर्ट ने कहा कि आखिर कैसे प्रभावित है. कोर्ट ने कहा कि राज्य की सुरक्षा और व्यक्ति की निजता के अधिकार के बीच संतुलन ज़रूरी है, और प्रभावित व्यक्ति रिपोर्ट के प्रासंगिक अंश जानने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में पहले ही एक समिति गठित की गई थी, जिसकी रिपोर्ट आ चुकी है. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और श्याम दिवान ने अमेरिका की एक जिला अदालत के फैसले का हवाला दिया, जिसमें भारत को प्रभावित देशों में शामिल बताया गया. साथ ही, वॉट्सएप द्वारा हैकिंग की पुष्टि का भी जिक्र किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत आशंकाओं का समाधान किया जा सकता है, लेकिन तकनीकी पैनल की रिपोर्ट को सड़कों पर चर्चा के लिए दस्तावेज नहीं बनाया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि अगर कोई देश स्पाइवेयर का इस्तेमाल कर रहा है तो इसमें क्या गलत है? स्पाइवेयर का होना गलत नहीं है, सवाल यह है कि आप किसके खिलाफ इसका इस्तेमाल कर रहे हैं आप देश की सुरक्षा का बलिदान नहीं दे सकते. कोर्ट ने कहा अगर इसका इस्तेमाल समाज के किसी व्यक्ति के खिलाफ किया जाता है, तो निश्चित रूप से इस पर गौर किया जाएगा. यह मामला पत्रकारों, न्यायाधीशों, कार्यकर्ताओं और अन्य व्यक्तियों की निगरानी के लिए पेगासस स्पाइवेयर के कथित उपयोग से संबंधित है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2021 में इस मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया था, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. वी रवींद्रन ने की थी. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कुछ मोबाइल उपकरणों में मैलवेयर की उपस्थिति पाई, लेकिन यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि यह पेगासस स्पाइवेयर था या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कानून के शासन द्वारा शासित लोकतांत्रिक देश में व्यक्तियों पर अंधाधुंध जासूसी की अनुमति नहीं दी जा सकती और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आरवी रविन्द्रन कि अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति को आदेश दिया. वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, वकील एमएल शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और आरएसएस विचारक के एन गोविंदाचार्य द्वारा जासूसी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिका दायर की गई है.
याचिकाओं में कथित जासूसी की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच की मांग की गई थी. याचिका में कहा गया था कि सैन्य ग्रेड स्पाइवेयर का उपयोग करके लक्षित निगरानी निजता के अधिकार का अस्वीकार्य उल्लंघन है. बता दें कि पेगासस जासूसी का मुद्दा दुनिया भर के तमाम देशों में इन दिनों सुर्खियां बना हुआ है. फ्रांस समेत कई देशों ने इसकी जांच को लेकर आदेश दिए है. याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी थी कि जब दूसरे देशों में इसको लेकर जांच हो रही है, तो भारत में क्यों नही.
-भारत एक्सप्रेस
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जोड़ते हुए दावा किया जा रहा है कि मुंबई…
Indian Festival 2026: Flipkart Big Billion Days और Amazon Great Indian Festival Sale शुरू हो…
श्रावस्ती में शटडाउन के बावजूद 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन चालू होने से दो…
नई दिल्ली में आयोजित ‘सेवा संकल्प – राष्ट्रनिर्माण के 25 साल’ समारोह में सेवा, सद्भाव…
नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी पत्नी नीलकंती पाटेकर चर्चा में हैं. जानिए मराठी…
दिल्ली हाईकोर्ट जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के…