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‘मैंने कुछ गलत नहीं किया…’ पर कोर्ट ने नहीं सुनी दलील; राजू सिंह की सजा पर स्टे की मांग खारिज

गैर-इरादतन हत्या के मामले में दोषी बिहार के साहिबगंज से पूर्व बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह की ओर से दायर अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट का लिखित फैसला आया है. कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनवाई गई सजा पर रोक लगाने की मांग वाली राजू कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है.

राऊज एवेन्यु कोर्ट ने गैर-इरादतन हत्या के मामले में राजू कुमार सिंह को 4 साल की सजा सुनाया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राजू सिंह अगर मुआवजे की राशि नही देते है तो, उन्हें तीन महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. कोर्ट ने यह सजा 304 पार्ट 2 में सुनाई है. वही आर्म्स एक्ट के मामले में कोर्ट ने 2 महीने की सजा सुनाया था.

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राजू सिंह जितने दिन तक जेल में रह चुके है. वह कम हो जाएगा. राजू सिंह ने अच्छे आचरण का हवाला देते हुए रिहाई की मांग की थी. कोर्ट से कहा था कि उन्होंने अभी तक कोई गलत नही किया है. जिनकी मौत हुई वो उनके दोस्त के बड़े भाई के दोस्त की पत्नी थी और उन्हें वो भाभी कहकर बुलाते थे. परिवार का सदस्य मरा है. मुझे महीने जेल में भी रहना पड़ा. मैंने कभी समाज के खिलाफ काम नही किया अच्छे आचरण को देखते हुए कम से कम सजा मिले.

प्रोबेशन ऑफिसर की रिपोर्ट पर कोर्ट ने किया विचार

कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया है. प्रोबेशन ऑफिसर की रिपोर्ट पर राऊज एवेन्यु कोर्ट ने विचार किया. रिपोर्ट के आधार पर वरिष्ठ वकील नंदिता राव ने कोर्ट को बताया था कि राजू कुमार सिंह पटना हाई कोर्ट से एक मामले में जमानत पर है. उन्हें एक अन्य मामले में बरी किया गया है, जबकि तीसरा मामला कोर्ट में अभी लंबित है.

उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया था कि राजू सिंह की पत्नी रेणु सिंह ने प्रोबेशन ऑफिसर से कहा था कि उनके पति को किसी भी मामले में जेल नही भेजा गया है. इससे पता चलता है कि राजू सिंह ने पहले किसी मामले में दोषी नही पाए गए हैं. कोर्ट ने उनकी पत्नी रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया था.

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर इन तीनों को दोषमुक्त करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि नए साल पार्टी में भीड़ भरे माहौल में आरोपी राजू सिंह द्वारा अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चलाना दर्शाता है कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि ऐसा करने से किसी व्यक्ति की मौत हो सकती है.

इस कृत्य को कोर्ट ने लापरवाही भरा माना है. यह मामला 31 दिसंबर 2018 को आयोजित एक पार्टी में हुई हर्ष फायरिंग में डॉक्टर अर्चना गुप्ता की मौत से संबंधित है. उस दौरान विधायक दिल्ली के वसंत कुंज स्थित अपने फॉर्महाउस में नए साल का जश्न मना रहे थे.

यह भी पढ़ें: TMC को सुप्रीम कोर्ट से झटका: चार बैंक खातों को अनफ्रीज करने की मांग खारिज

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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