Satyendra Jain STP: नई दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कथित STP घोटाला मामले में तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट इस मामले में 3 सितंबर को अपना फैसला सुना सकता है. सुनवाई के दौरान जैन की ओर से वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने गिरफ्तारी और जांच की जरूरत पर कई सवाल उठाए, जबकि एसीबी ने जमानत का विरोध करते हुए उन्हें आदतन अपराधी बताया.
सत्येंद्र जैन की ओर से दलील देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा कि मामले में एफआईआर दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद जैन को गिरफ्तार किया गया. इस दौरान उन्हें सिर्फ एक बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था. वकील के मुताबिक, जब उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया तो उसी दौरान गिरफ्तार कर लिया गया. बचाव पक्ष ने कहा कि मामले से जुड़ी सामग्री मुख्य रूप से दस्तावेजी है और जांच एजेंसियां पहले ही सभी जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले चुकी हैं. ऐसे में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं थी. वकील ने यह भी कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य दंड देना नहीं होना चाहिए.
जैन के वकील ने कोर्ट में कहा कि मामले को दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है, इसके बावजूद जांच एजेंसियां जांच को शुरुआती चरण में बता रही हैं. उन्होंने कहा कि पूरा मामला ईडी की जांच पर भी निर्भर है. बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि सत्येंद्र जैन ने फैसले अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से नहीं लिए थे. उनके मुताबिक, जैन को तकनीकी मामलों में विशेषज्ञ अधिकारियों की सलाह और सिफारिशों पर निर्भर रहना पड़ा था.
रोहिणी STP की क्षमता को सत्येंद्र जैन के निर्देश पर 15-25 एमजीडी से बढ़ाकर 15-30 एमजीडी किए जाने के आरोप पर भी बचाव पक्ष ने सवाल उठाए. वकील ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड इन आरोपों का समर्थन नहीं करता. वहीं, एसीबी की ओर से जमानत का विरोध किया गया. एजेंसी ने कोर्ट से कहा कि जमानत पर फैसला लेते समय जैन के कथित आपराधिक रिकॉर्ड और उन्हें आदतन अपराधी बताए जाने के पहलू पर भी विचार किया जाना चाहिए.
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एसीबी ने इस मामले में सत्येंद्र जैन समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ और आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, तत्कालीन कॉन्ट्रैक्ट कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव, एएन इंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट के मालिक राजा कुमार कुर्रा और श्रीजनहार के मालिक पंकज वर्मा शामिल हैं.
एसीबी ने वर्ष 2024 में दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर में कथित अनियमितताओं को लेकर एफआईआर दर्ज की थी. जांच में कथित पैसों के लेनदेन का पहलू भी सामने आया है. अधिकारियों के अनुसार, उदित प्रकाश राय तक करीब 1.52 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत पहुंचाए जाने की बात जांच में सामने आई है.
अक्टूबर 2022 में दिल्ली जल बोर्ड ने 10 STP को अपग्रेड करने के लिए चार बड़े टेंडर जारी किए थे. इनकी कुल अनुमानित लागत करीब 1943 करोड़ रुपये बताई गई. आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर एक कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई. एसीबी के मुताबिक, टेंडर में ऐसी शर्तें जोड़ी गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने का आरोप है. जांच के दौरान बिचौलियों और अधिकारियों के बीच बातचीत से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिलने की बात भी सामने आई है. ईमेल से कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि टेंडर से जुड़े दस्तावेज कुछ कंपनियों को पहले ही भेज दिए गए थे. इस मामले से जुड़े चार STP टेंडरों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने दिसंबर 2025 में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की थी. अब सभी की नजरें 3 सितंबर को आने वाले कोर्ट के फैसले पर हैं.
भारत एक्सप्रेस
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