संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का विदेश दौरा
Mohan Bhagwat Foreign Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने पर संघ ने अपने वैश्विक संपर्क अभियान को तेज कर दिया है. संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 24 अगस्त से 17 दिवसीय विदेश दौरे पर रवाना हो रहे हैं. इस मैराथन यात्रा के दौरान वे कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन (इंग्लैंड) के प्रमुख शहरों टोरंटो, न्यूयॉर्क और लंदन में आयोजित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि संघ के शताब्दी वर्ष में मोहन भागवत के इस 17 दिवसीय विदेश दौरे का असली मकसद क्या है?
भारत को लेकर भ्रांतियों पर प्रहार (Mohan Bhagwat Foreign Visit Plan)
आरएसएस के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद के अनुसार, इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य पश्चिमी देशों में भारत, हिंदू समाज और संघ की विचारधारा को लेकर फैले दुष्प्रचार और भ्रांतियों को दूर करना है. डॉ. भागवत अंतरराष्ट्रीय मंचों से तथ्य-आधारित, प्रमाणिक और सकारात्मक दृष्टिकोण सामने रखेंगे ताकि भारत की समृद्ध संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों की सही तस्वीर दुनिया तक पहुंचे.
मैडिसन स्क्वायर से गूंजेगा वसुधैव कुटुंबकम् (Mohan Bhagwat Canada Visit)
दौरे की शुरुआत कनाडा के टोरंटो से होगी, जिसके बाद डॉ. भागवत अमेरिका पहुंचेंगे. 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक ‘मैडिसन स्क्वायर’ में एक भव्य समारोह का आयोजन होगा, जिसे संघ प्रमुख संबोधित करेंगे. न्यूयॉर्क में वे सार्वभौमिक एकता (Universal Oneness) कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और भारतीय ऋषि-मुनियों के ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ (विश्व एक परिवार है) के विचार को वैश्विक पटल पर रखेंगे.
40 देशों में हिंदू स्वयंसेवक संघ का नेटवर्क (Mohan Bhagwat RSS Centenary Year)
विदेशों में संघ की शाखाएं और गतिविधियां ‘हिंदू स्वयंसेवक संघ’ (HSS) के नाम से करीब 40 देशों में संचालित होती हैं. अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के नागरिक और स्थानीय लोग इन नियमित शाखाओं से जुड़े हैं. इस 17 दिवसीय दौरे का मुख्य लक्ष्य विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों, हिंदू समुदाय और स्थानीय संगठनों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना और उनके अधिकारों व हितों को मुख्यधारा के समाज के साथ जोड़ना है.
भारतीय समाज को एकजुट करने का प्रयास
कनाडा और अमेरिका के बाद डॉ. मोहन भागवत इंग्लैंड जाएंगे, जहां लंदन में वे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक नेतृत्व से जुड़े सम्मेलनों को संबोधित करेंगे. संघ के शताब्दी वर्ष में हो रहा यह 17 दिवसीय दौरा न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रवासी भारतीय समाज को एकजुट करने का एक बड़ा प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैचारिक नेतृत्व को स्थापित करने का भी स्पष्ट संदेश है.
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