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सुप्रीम कोर्ट की चिंता: दिव्यांगजन अधिकार कानून बेअसर? केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Supreme Court Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यगजनों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए संस्थागत ढांचे की प्रवभावशीलता पर चिंता जाहिर की है. साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट 21 जुलाई को मामले में अगली सुनवाई करेगा.

मुख्य आयुक्त और राज्य आयुक्तों को अधिकार दिया

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील राहुल बजाज ने कोर्ट को बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत मुख्य आयुक्त और राज्य आयुक्तों को अधिकार दिया गया है. लेकिन व्यवहार में इन संस्थाओं की सिफारिशों और आदेशों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है. उन्होंने अधिनियम की धारा 89 और 93 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई है.

कार्यशैली वेबसाइट और ऑनलाइन शिकायत

दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि कई सरकारी विभाग और प्राधिकरण दिव्यांग आयोगों की सिफारिशों को नजरअंदाज कर देते हैं. कई मामलों में न तो सिफारिशों का पालन किया जाता है और न हो असहमति के कारण बताया जाता है. जबकि कानून इसकी उम्मीद करता है. इससे दिव्यांग व्यक्तियों को अपने अधिकारों के उल्लंघन पर प्रभावी राहत नहीं मिल पाती.

याचिकाकर्ता का आरोप है कि अधिनियम में निर्धारित दंडात्मक प्रावधानों का समुचित इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. इसके अलावा कई राज्य दिव्यांग आयोगों के पास न तो कार्यशैली वेबसाइट हैं और न ही ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की पर्याप्त व्यवस्था, जिससे दिव्यांगजनों को शिकायतों के निवारण में कठनाइयों का सामना करना पड़ता है.

सलाहकार समितियों के गठन की मांग

दायर याचिका में मुख्य आयुक्त और राज्य आयुक्तों की सहायता के लिए गठित किए जाने वाले सलाहकार समितियों के गठन की मांग की गई है. साथ ही मुख्य आयुक्त और आयुक्तों के रिक्त पदों को भरने तथा आयोगों में पर्याप्त कर्मचारी और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है.

याचिकाकर्ता के मुताबिक मुख्य आयुक्त का पूर्णकालिक पद लंबे समय से खाली है. जबकि सहायक आयुक्तों के पदों पर भी नियुक्ति नहीं हुई है. जिसके चलते आयोगों का काम प्रभावित हो रहा है.

यह भी पढ़ें: नीट यूजी 2026: इसी साल से CBT कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, जुलाई में अगली सुनवाई

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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