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सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी के प्रदूषण के मामले में लिए गए स्वतः संज्ञान से संबंधित कार्यवाही को बंद किया

सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी के प्रदूषण के मामले में लिए गए स्वतः संज्ञान से संबंधित कार्यवाही को बंद करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने मामले को वापस भेजते हुए कहा कि एक मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी में होने से लोगों में भ्रम और निर्देशों में असंगति पैदा हो सकती है.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ और गरिमापूर्ण वातावरण में जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार का हिस्सा है. कोर्ट ने यह भी कहा कि एनजीटी अंतिम मंच नहीं है. उसके आदेशों के विरुद्ध न्यायिक समीक्षा की अपीलीय शक्तियां उपलब्ध हैं. इसलिए हम मानते हैं कि स्वतः संज्ञान कार्यवाही बंद की जाए और एनजीटी के समक्ष कार्यवाही फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाए.

इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि पहले एनजीटी यमुना की पानी की गुणवत्ता से संबंधित मुद्दों की निगरानी कर रहा था और समय-समय पर आदेश दे रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद एनजीटी ने निगरानी बंद कर अपनी समितियों को भंग कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने यमुना से जुड़े लंबित मामलों पर उठाया सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा था कि यमुना नदी से संबंधित अन्य मुद्दे किसी अन्य पीठ के पास लंबित है क्या? कोर्ट ने यह भी पूछा था क्या उन सभी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्लब कर सुना जाए या एनजीटी को ट्रांसफर कर दिया जाए. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने हरियाणा और दिल्ली सरकार से यमुना नदी के प्रदूषण पर अपनी स्टेट्स रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था. प्रदूषित नदियों का निवारण शीर्षक से एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि यमुना के प्रदूषण के साथ-साथ तटीय क्षेत्रों और उपचारात्मक उपायों से संबंधित मामले समक्ष है.

13 जनवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने यमुना और गंगा नदियों के प्रदूषण का संज्ञान लिया था और कहा था कि प्रदूषण मुक्त जल संवैधानिक ढांचे के तहत मूल अधिकार है और एक कल्याणकारी राज्य इसे सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है.

दरअसल दिल्ली जल बोर्ड ने एक याचिका दायर कर यह शिकायत की थी कि हरियाणा में उद्योगों से निकला जहरीला पानी नदी में छोड़ा जा रहा है. इससे पानी में अमोनिया का स्तर बहुत बढ़ गया है. यमुना के जल में अमोनिया का स्तर बढ़ने पर दिल्ली जल बोर्ड आमतौर पर जलापूर्ति रोक देता है.

ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल एसआईआर मामला: सत्यापन पूरा करने के लिए सिविल जजों की नियुक्ति का निर्देश दिया, सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर दिया आदेश।

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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