सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने रिटर्निंग अधिकारी के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) ही दायर की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट या आर्टिकल 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट के पास कोई अधिकार-क्षेत्र नहीं होता है.
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने कहा कि शिकायत भले ही निजी थी लेकिन कोर्ट ने नोटिस जारी किया यानी वह प्रथम दृष्टया शिकायत से सहमत है. सिंघवी ने कहा कि नए कानून में एक शर्त जोड़ी गई है कि मामले का संज्ञान लेने से पहले संभावित आरोपी की बात सुनी जानी चाहिए. मेरा मुद्दा आरोप तय करने को लेकर है, लेकिन निजी शिकायत में संज्ञान लिया जाना चाहिए. इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि समन जारी किए जा चुके हैं. सिंघवी ने कहा कि सिर्फ नोटिस जारी किया गया है. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि लेकिन नोटिस तब जारी किए जाते हैं, जब कोर्ट प्रथम दृष्टया संतुष्ट हो.
सिंघवी ने कहा कि सेक्शन के तहत आरोप तय करना जरूरी है. सिंघवी ने कहा कि धारा 33A के तहत उम्मीदवार को उन आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है, जिनमें उसके खिलाफ ऐसे अपराध का आरोप हो जिसकी सजा दो साल या उससे अधिक हो और जहां किसी सक्षम अदालत द्वारा आरोप तय किए जा चुके हों. सिंघवी ने चुनाव परिणाम घोषित होने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि कल ही अदालत के समक्ष इस मुद्दे का उल्लेख किया था, लेकिन इसके बावजूद चुनाव परिणाम घोषित कर दिए गए. इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने सिंघवी से पूछा कि क्या कोई ऐसा उदाहरण या फैसला है, जिसमें रिटर्निंग अधिकारी द्वारा नामांकन रद्द किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए नामांकन स्वीकार करने का आदेश दिया हो?
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील ने नटराजन की ओर से दायर याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका इलेक्शन पिटीशन के जरिए सुनी जानी चाहिए. मीनाक्षी नटराजन की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि रिटर्निंग अधिकारी के आदेश पूरी तरह नियम के खिलाफ हैं, जिन्हें जल्दबाजी में लिया गया और अवैध बताया गया है. साथ ही रिटर्निंग अधिकारी के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी.
मध्य प्रदेश में 18 जून को राज्यसभा चुनाव होना है. रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने बीजेपी की आपत्ति स्वीकार करते हुए नामांकन रद्द कर दिया था. बीजेपी का आरोप था कि नटराजन ने तेलंगाना में लंबित एक मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में नहीं दी थी. नामांकन रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेश के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन पत्र के फॉर्म 26 में शपथ पत्र में मुकदमे का उल्लेख नहीं किया था. कांग्रेस ने इस फैसले को अवैध बताया है और आरोप लगाया है कि बीजेपी ने पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए साजिश रची है.
दरअसल यह मामला सितंबर 2025 में तेलंगाना के हैदराबाद स्थित नामपल्ली जिला मजिस्ट्रेट अदालत में कांग्रेस कार्यकर्ता ए. श्रीलता द्वारा दायर एक निजी शिकायत से जुड़ा है. श्रीलता का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया. रेड्डी पर उन्होंने यौन दुराचार, छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद तेलंगाना कांग्रेस के नेताओं, जिनमें मीनाक्षी नटराजन शामिल हैं, ने शिवकुमार रेड्डी की प्राथमिक सदस्यता रद्द कराने के लिए हस्तक्षेप नहीं किया.
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सितंबर 2025 में नटराजन के प्रभारी बनने के सात महीने बाद, श्रीलता ने फिर आरोप लगाया कि उन्हें रेड्डी और उनके समर्थकों से जान का खतरा है. लेकिन उसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने नटराजन और सात अन्य पर निजी शिकायत दर्ज कराई थी.
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