सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की बोर्ड परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया (कॉपी चेकिंग सिस्टम) को लेकर देश भर के करोड़ों छात्रों की बढ़ती मानसिक परेशानियों और अनिश्चितता पर गहरी चिंता व्यक्त की है.
माननीय मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष खंडपीठ ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और सीबीएसई प्रशासन से सीधा सवाल पूछा है कि स्कूली छात्रों की कॉपियों के मूल्यांकन की मौजूदा त्रुटिपूर्ण व्यवस्था में सुधार करने के लिए अब तक धरातल पर क्या-क्या ठोस कदम उठाए गए हैं? अदालत ने इन सभी सुधारात्मक कदमों का पूरा और प्रमाणित विवरण (रिपोर्ट) तलब किया है. सुप्रीम कोर्ट इस जनहित याचिका पर अब आगामी सप्ताह में विस्तृत सुनवाई करेगा.
यह पूरा कानूनी विवाद सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं में लागू की गई ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग यानी ओएसएम (OSM) मूल्यांकन प्रणाली से जुड़ा हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में दायर इस मुख्य याचिका में कड़े नियम और पारदर्शी दिशा-निर्देश (गाइडलाइंस) तय करने की पुरजोर मांग की गई है, ताकि बोर्ड परीक्षाओं का मूल्यांकन पूरी तरह से त्रुटिहीन, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जा सके और छात्रों को उनके लिखे अनुसार ही अंक मिलें.
मामले की लाइव सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत ने बेहद भावुक और सख्त लहजे में सीबीएसई के वकीलों से कहा कि जरा इन छोटे-छोटे स्कूली बच्चों की निराशा और मानसिक तनाव को देखिए.
कोर्ट का सीधा इशारा उस गंभीर डर, अवसाद और भारी तनाव की तरफ था जो मूल्यांकन में होने वाली मानवीय या तकनीकी गलतियों के कारण कम उम्र के स्कूली बच्चों को परीक्षा परिणामों के बाद झेलना पड़ता है. सीजेआई ने स्पष्ट संकेत दिए कि देश की इस सबसे बड़ी परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े संरचनात्मक मुद्दों पर अब बहुत गंभीरता से विचार करने और बड़े बदलाव करने की परम आवश्यकता है.
पीठ के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि वर्तमान सीबीएसई व्यवस्था में कुछ ऐसी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं लगातार उभर रही हैं, जिन्हें जल्द से जल्द दूर करने के लिए अदालत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का सकारात्मक सहयोग चाहती है. उन्होंने साफ किया कि उच्चतम न्यायालय का प्राथमिक उद्देश्य यहाँ किसी अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करना कतई नहीं है, बल्कि करोड़ों बच्चों के भविष्य के मद्देनजर इस जटिल समस्या का एक स्थायी और व्यावहारिक समाधान तलाशना है.
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और सीबीएसई का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम से अवगत कराया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन और ओएसएम (OSM) प्रणाली में आ रही इन तमाम तकनीकी खामियों व विसंगतियों की व्यापक समीक्षा करने के लिए सरकार द्वारा पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (कमेटी) का विधिवत गठन कर दिया गया है.
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सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को यह भरोसा भी दिलाया कि कुछ छात्रों की व्यक्तिगत मार्कशीट में नंबरों के हेरफेर से जुड़ा जो मूल विवाद था, उसे बोर्ड स्तर पर पहले ही पूरी तरह सुलझा लिया गया है; जबकि देश की संपूर्ण मूल्यांकन प्रणाली में दीर्घकालिक ढांचागत बदलाव करने की मुख्य मांग पर यह नवगठित विशेषज्ञ समिति बहुत गहराई से विचार कर रही है, जिसकी रिपोर्ट जल्द ही पेश की जाएगी.
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