लीगल

पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में दायर विभिन्न याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी

West Bengal SIR Controversy: पश्चिम बंगाल एसआईआर (SIR) मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 9 फरवरी को करेगा. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

नियुक्ति और दस्तावेजों की अस्वीकृति पर सवाल

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने दलील दी कि चुनाव आयोग द्वारा 8300 माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए हैं, जबकि संविधान में ऐसे किसी पद की परिकल्पना नहीं की गई है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि जो दस्तावेज कानूनी रूप से स्वीकृत हैं, उन्हें भी अस्वीकार किया जा रहा है, जैसे डोमिसाइल प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और ओबीसी प्रमाणपत्र. इस प्रक्रिया की वजह से लोगों को 4 से 5 घंटे तक लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है.

सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार बांग्ला भाषा में पारंगत एक टीम उपलब्ध कराती है और आयोग को बताती है कि यह स्थानीय बोली की गलती है, तो इससे प्रक्रिया में मदद मिलेगी.

चुनाव आयोग पर ‘सौतेले व्यवहार’ का आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कोर्ट के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ कर रहा है. उन्होंने कहा, “आयोग दूसरे राज्यों में आधार सहित अन्य दस्तावेजों को स्वीकार कर रहा है, लेकिन बंगाल में नहीं.” बनर्जी ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने आयोग को 6 पत्र लिखे लेकिन न्याय नहीं मिला.

उन्होंने कुछ उदाहरण देते हुए बताया कि कई बेटियां जो शादी के बाद ससुराल चली गई हैं, उनका नाम एकतरफा हटा दिया गया है. याचिका में मांग की गई है कि आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर और अन्य राज्य-स्तरीय दस्तावेजों को सत्यापन के लिए स्वीकार किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा हो सके.

ये भी पढ़ें- व्यक्तित्व सुरक्षा की मांग को लेकर फिल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने भी दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

70 लाख नामों पर मंडराता खतरा

ममता बनर्जी ने याचिका के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. याचिकाकर्ता के अनुसार, ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ (तार्किक विसंगति) श्रेणी के तहत लगभग 70 लाख नामों को वर्तनी के अंतर या अन्य छोटी त्रुटियों के कारण नोटिस दिया गया है. मांग की गई है कि साल 2002 की मतदाता सूची के आधार पर इन त्रुटियों को सुधारने का मौका दिया जाए, न कि सीधे नाम हटाया जाए.

टीएमसी प्रमुख ने निर्वाचन आयोग पर बीजेपी के इशारे पर काम करने और उनके प्रतिनिधिमंडल का अपमान करने का भी आरोप लगाया. गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने एलएलबी की है, हालांकि वह प्रैक्टिसिंग एडवोकेट नहीं हैं, फिर भी उन्होंने जनहित और निष्पक्ष चुनाव की रक्षा के लिए इस प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती दी है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

Jio प्लेटफॉर्म्स IPO का अलॉटमेंट फाइनल: ग्रे मार्केट में तगड़ा उछाल, लिस्टिंग पर मालामाल होंगे निवेशक

निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी! जियो प्लेटफॉर्म्स के मेगा आईपीओ में शेयरों का अलॉटमेंट फाइनल…

10 minutes ago

सोना ₹1,457 महंगा, चांदी स्थिर; जानें 22 और 24 कैरेट गोल्ड के ताजा भाव

Gold Silver Rate Today 27 October: 27 अक्टूबर को सर्राफा बाजार में सोने की कीमत…

20 minutes ago

MLC Election Result: यूपी-बिहार समेत 4 राज्यों के नतीजों आज, जानें किसके सिर सजेगा ताज?

उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद की 28 सीटों के चुनाव परिणामों…

35 minutes ago

Vijay-Rashmika की टीम पहुंची साइबर क्राइम! सोशल मीडिया पर फर्जी पोस्ट और छेड़छाड़ वाले स्क्रीनशॉट का आरोप

Vijay Rashmika Fake Social Media Posts: विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की ‘विरोश’ टीम ने…

46 minutes ago

Bigg Boss 20: लव गिल और स्काउट के बीच बढ़ी दूरियां, रो-रोकर हुआ बुरा हाल; बोलीं- ‘मैं अंदर से मर गई हूं’

'बिग बॉस 20' के घर में ड्रामा रुकने का नाम नहीं ले रहा है. वीकेंड…

54 minutes ago

चक्रवात ‘अर्नब’ का मचेगा तांडव: 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, 70 की स्पीड से चलेंगी हवाएं

27 अक्टूबर के मौसम को लेकर दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, बिहार और कई अन्य राज्यों में…

2 hours ago