लीगल

उत्तराधिकार संशोधन कानून को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने सीधे सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मिजोरम के उत्तराधिकार कानून में कथित लैंगिक व वैवाहिक भेदभाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सीधे सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले में संबंधित हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा कि आपने पहले हाई कोर्ट में याचिका क्यों नहीं दायर की और आप सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए?

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच ने उस याचिका पर सुनवाई से इनकार किया, जिसमें गैर-मिजो पुरुषों से शादी करने वाली मिजो महिलाओं को पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार के अधिकार से वंचित किए जाने के प्रावधान को चुनौती दी गई थी. यह याचिका मेरियम हरंगचल की ओर से दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को गुवाहाटी हाई कोर्ट (Guwahati High Court) जाने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया.

सीजेआई बोले- ‘संशोधन पर विचार की जरूरत’

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की आवश्यकता नहीं है और याचिकाकर्ता की शिकायत पर संबंधित हाई कोर्ट विधिवत विचार कर सकता है. सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने मिजो तलाक और उत्तराधिकार के कानूनी पहलुओं का मुद्दा उठाया, तो सीजेआई सूर्यकांत ने कहा:

“कोर्ट याचिका में उठाए गए मुद्दे की अहमियत और गंभीरता को समझता है. प्रथम दृष्टया इन संशोधनों पर पुनर्विचार की आवश्यकता भी दिखाई देती है, लेकिन सवाल यह है कि याचिकाकर्ता पहले हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटा सकती?”

आशंका पर कोर्ट की टिप्पणी

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वे मिजोरम की स्थानीय व पारंपरिक संस्थाओं को लेकर काफी संवेदनशील हैं. इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या गुवाहाटी हाई कोर्ट की खंडपीठ (आइजोल बेंच) मिजोरम में कार्यरत नहीं है? सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हाई कोर्ट का गठन ऐसे ही स्थानीय व संवैधानिक मामलों की सुनवाई के लिए किया गया है और यह मामला वहां उठाया जा सकता है.

पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को सीधे दिल्ली आकर यात्रा और ठहरने पर भारी खर्च करने की आवश्यकता क्यों पड़नी चाहिए. जब याचिकाकर्ता के वकील ने मिजोरम में याचिका दायर करने पर संभावित सामाजिक विरोध या प्रतिक्रिया की आशंका जताई, तो कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली में भी प्रतिक्रिया का खतरा कम नहीं होता है.

कानूनी लड़ाई जारी रखने की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह एक अच्छा, न्यायसंगत और महत्वपूर्ण उद्देश्य है तथा याचिकाकर्ता को अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखनी चाहिए, लेकिन इससे पहले संबंधित हाई कोर्ट को इस मामले के कानूनी व संवैधानिक पहलुओं पर विचार करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए.

अदालत ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि मिजोरम राज्य विधानसभा द्वारा वर्ष 2014 के उत्तराधिकार कानून में किए गए संशोधनों को चुनौती देने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की कोई आवश्यकता नहीं है.

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

कोलकाता एयरपोर्ट पर CISF की बड़ी कार्रवाई: बैंकॉक जा रहे 2 संदिग्धों से ₹1.13 करोड़ की अमेरिकी मुद्रा जब्त

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीआईएसएफ ने बैंकॉक जाने वाली…

5 hours ago

रिलायंस के जामनगर कॉम्प्लेक्स पहुंचा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल: मुकेश अंबानी से मिले मार्को रुबियो और सर्जियो गोर, Jio IPO को भी मिला बंपर रिस्पॉन्स

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के जामनगर…

5 hours ago

दिवाली से पहले पुलिसकर्मियों को सीएम योगी का बड़ा तोहफा, बढ़े यूनिफॉर्म और मोटरसाइकिल भत्ते; विपक्ष पर भी साधा निशाना

UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में यूपी पुलिस को बड़ा…

7 hours ago

टाइगर पर हमले से पहले किन सितारों पर थी शूटरों की नजर? जानिए किसके पास कैसी है सुरक्षा

Bollywood Celebs Security: टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है.…

8 hours ago