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खबर पढ़कर रातों-रात PIL दाखिल करना सही नहीं, सुप्रीम कोर्ट की युवा वकील को नसीहत

सुप्रीम कोर्ट ने एक युवा वकील द्वारा जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने के तौर-तरीकों पर गहरी नाराजगी जाहिर की है. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वकालत का पेशा बहुत बड़ी जिम्मेदारी से जुड़ा है और किसी भी मुद्दे को केवल अखबार में पढ़ लेने के बाद उसे तुरंत जनहित याचिका में बदल देना उचित नहीं है. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणियां करते हुए युवा वकील को नसीहत दी.

सुनवाई के दौरान कोर्ट के तीखे सवाल

सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने वकील से कड़े सवाल पूछते हुए कहा कि एक प्रैक्टिसिंग वकील के तौर पर आपको इस मामले से क्या लेना-देना है और क्या आप खुद अपना केस लड़ रहे हैं? बेंच ने पूछा कि आपकी चिंता असल में क्या है? क्या ये केस आपको लड़ने हैं? आपने यह याचिका किसके कहने पर दाखिल की है? क्या इस कदम उठाने से पहले आपने गहराई से सोचा था?

कोर्ट ने युवा वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि किसी मुद्दे को तुरंत जनहित याचिका में बदलकर अदालत के सामने ले आना और अपनी वकालत का बैंड उतारकर पार्टी-इन-पर्सन (Party-in-person) के रूप में पेश हो जाना सही तरीका नहीं है. ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले अच्छी तरह विचार किया जाना चाहिए.

शिक्षकों की रिटायरमेंट का उदाहरण

अदालत ने शिक्षकों की सेवानिवृत्ति (Retirement) की उम्र 65 वर्ष से अधिक करने जैसे नीतिगत मुद्दों का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी नीति से जुड़े बड़े विषयों को उठाना है, तो उसके व्यापक प्रभावों (Broader Implications) और सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना बेहद जरूरी है.

वकीलों की बड़ी जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि एक वकील की जिम्मेदारी बहुत बड़ी होती है. वकील अदालत के सामने केवल अपने मुवक्किल या खुद के पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि वह पूरी न्याय व्यवस्था (Justice Delivery System) का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है.

अदालत ने यह भी चिंता जताई कि अदालतों पर पहले से ही मुकदमों का भारी बोझ है, ऐसे में कोई भी याचिका दाखिल करने से वास्तव में समाज या पीड़ित पक्ष की कोई मदद होगी या नहीं, इस पर हर वकील को आगे बढ़ने से पहले दो बार विचार जरूर करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि वकालत केवल कागज पर लिखी कुछ बातों को अदालत तक पहुंचा भर देने का काम नहीं है, बल्कि हर मामले के दूरगामी और व्यापक असर को समझना एक जिम्मेदार वकील का कर्तव्य है.

गोपाल कृष्ण

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