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तीन दशक पुराने योजना लागू नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को लिया आड़े हाथ

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को लगभग तीन दशक पुराने एक योजना ने लागू नही करने पर आड़े हाथ लिया है. कोर्ट ने कहा कि यदि पंजाब सरकार योजना को जल्द लागू नही करती है, तो वह लाभार्थियों को आर्थिक मदद देने का आदेश दे सकता है. इससे पहले जस्टिस अभय एस ओका सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा सहित अन्य को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पंजाब सरकार के ढुलमुल रवैये को लेकर कड़ी टिप्पणी की है.

4 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट ने कहा कि प्रशासन बार-बार आश्वासन दे रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जिसे शर्मनाक करार दिया. सुप्रीम कोर्ट ने योजना को लागू नही करने पर सरकार को चेतावनी दी है और कहा है कि राज्य सरकार इसे हल्के में ना ले. कोर्ट 4 अप्रैल को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. पिछली सुनवाई में जस्टिस ओका ने कहा था कि अब से हम इस राज्य की कोई मौखिक बयान स्वीकार नहीं करेंगे. हम वकील से कहेंगे कि संबंधित अधिकारी द्वारा हलफनामा दाखिल करने के लिए किया जाए.

पंजाब सरकार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में हुए पेश

वही सुनवाई के दौरान पंजाब के मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए. कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा था कि आप अधिकारियों को जेल जाने दीजिए. उसके बाद हम सुनेंगे. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि हाई कोर्ट से 2 बार से अधिक वचन देने के बाद भी राज्य सरकार ने बहुत समय बर्बाद किया. यह मामला रजनीश कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा पंजाब प्राइवेटली मैनेज्ड एफिलिएटेड एंड पंजाब गवर्नमेंट एडेड कॉलेज पेंशनरी बिनीफिट्स स्कीम 1996 के क्रियान्वयन की मांग वाली याचिका से संबंधित है.

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18 दिसंबर को जारी की गई थी योजना

यह योजना 18 दिसंबर 1996 को जारी की गई थी, लेकिन आज तक इसे लागू नही किया गया. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि पंजाब सरकार ने 2001 में हाई कोर्ट को कहा था कि 3 महीने में योजना को अंतिम रूप दे दिया जाएगा. लेकिन 2002 में उच्च शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने कोर्ट में पेश होकर आदेशों की पालन न करने पर खेद व्यक्त किया था. इसके बाद कहा गया था कि जून 2002 तक लागू किया जाएगा, लेकिन यह लागू नही किया गया और 2002 में नई योजना पेश की गई जिससे फिर विवाद खड़ा हो गया. इसके बाद अदालत को बार,- बार आश्वासन दिया गया लेकिन लागू नही किया गया.

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

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