लीगल

ताज ट्रेपेजियम जोन में उद्योगों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, विशेषज्ञ समिति बनाने के संकेत

ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में नए उद्योगों की अनुमति देने के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि वह विशेषज्ञों की एक समिति बना सकता है. यह समिति हर आवेदन की अलग-अलग जांच करेगी और तय करेगी कि संबंधित उद्योग प्रदूषण फैलाता है या नहीं.

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. उत्तर प्रदेश सरकार ने 2024 के उस फैसले में बदलाव की मांग की है, जिसमें TTZ में नए उद्योगों पर रोक लगाई गई थी.

सुनवाई के दौरान केंद्र और यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सरकार किसी भारी उद्योग को मंजूरी देने की बात नहीं कर रही है. केवल छोटे और मध्यम उद्योग (MSME) के प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ऐसे करीब 400 आवेदन लंबित हैं और इन पर फैसला न होने से लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है.

वहीं, न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) अपर्णा भट्ट ने कहा कि फिरोजाबाद क्षेत्र में पहले से चल रही ग्लास इंडस्ट्री के अलावा भी कई उद्योगों को मंजूरी दी गई, जबकि पर्यावरण मंत्रालय (MoEF) ने इसकी सलाह नहीं दी थी. उन्होंने दावा किया कि मंत्रालय की एक आंतरिक बैठक में भी इस पर चिंता जताई गई थी.

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी की सहमति है कि केवल ऐसे उद्योगों को अनुमति मिलनी चाहिए जो प्रदूषण न फैलाएं. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) की रिपोर्ट में ऐसे उद्योगों की जानकारी मौजूद है. इसलिए कोर्ट केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) और NEERI के विशेषज्ञों की एक संयुक्त समिति बनाने पर विचार कर रहा है, ताकि हर आवेदन की वैज्ञानिक आधार पर जांच हो सके.

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यदि हर मामले में लोगों को सुप्रीम कोर्ट आना पड़े तो यह व्यावहारिक नहीं होगा. इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे फैसले जल्दी हों और अनावश्यक सरकारी प्रक्रियाओं तथा लालफीताशाही से बचा जा सके.

क्या है ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ)?

TTZ करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर का संरक्षित क्षेत्र है. इसमें उत्तर प्रदेश के आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और एटा तथा राजस्थान के भरतपुर जिले शामिल हैं. ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1996 में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, 200 से अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को बंद या स्थानांतरित करने और स्वच्छ ईंधन (CNG/LPG) अपनाने के निर्देश दिए थे.


ये भी पढ़ें: आवारा कुत्तों-बंदरों के आतंक पर HC सख्त, अधिकारियों पर लटकी अवमानना की तलवार


पेड़ों की गणना का मुद्दा भी लंबित

पिछली सुनवाई में ऐश्वर्या भाटी ने कहा था कि पेड़ों की निगरानी का काम केंद्र की अधिकार प्राप्त समिति या राज्य का वन विभाग कर सकता है. वहीं वरिष्ठ वकील और न्याय मित्र एडीएन राव ने सुझाव दिया था कि अवैध पेड़ कटाई के लिए संबंधित थाना प्रभारी (SHO) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया जाए. इस पर अदालत ने कहा था कि पहले पूरे क्षेत्र में मौजूद पेड़ों की सही गणना जरूरी है, क्योंकि बिना उसके प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा.

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

‘संसार का हर शब्द आपकी स्तुति है ‘षष्ठी पर पीएम मोदी ने शेयर किया आदि शंकराचार्य द्वारा रचित पवित्र श्लोक

PM Modi Navratri Post: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुक्रवार को मां कात्यायनी को…

41 minutes ago

सैलरी लिमिट बदलते ही EPFO का बड़ा एक्शन: पीएफ रिटर्न जमा करने की लास्ट डेट बढ़ी, 31 अक्टूबर तक करें अप्लाई

EPFO News: EPFO ने सितंबर का पीएफ रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर…

58 minutes ago

लो जी, आ गई ठंड! रजाई निकाल लो भाई… दिल्ली में 6 डिग्री लुढ़का पारा, आज भी बरसेगा पानी?

दिल्ली-NCR में तेज हवाओं और बारिश के बाद अक्टूबर में ही गुलाबी ठंड का अहसास…

58 minutes ago

त्योहारी सीजन में CP बंद! सेंट्रल पार्क में प्रदर्शन को लेकर पुलिस का बड़ा एक्शन, व्यापारियों ने मांगी सुरक्षा

Delhi News: कनॉट प्लेस प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का बड़ा बयान, सुरक्षा और त्योहारी सीजन…

1 hour ago