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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सुप्रीम कोर्ट से मानहानि मामले में मिली राहत

मानहानि के मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत को कोर्ट ने बरकरार रखा है. जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच इस मामले में 26 मार्च को अगली सुनवाई करेगी. तब तक शिवराज सिंह को व्यक्तिगत रूप से पेशी पर छूट जारी रहेगी. शिवराज सिंह चौहान और दो अन्य के खिलाफ दर्ज मानहानि के मामले को रद्द करने से इनकार करने वाले मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ जमानती वारंट का निष्पादन मामले में अदालत के समक्ष कार्यवाही में उनकी प्रभावी भागीदारी के अधीन नही किया जाएगा. मामले की सुनवाई के दौरान शिवराज सिंह चौहान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा की ओर से शिकायत में जो बाते कही गई है वह सदन के पटल पर रखी जा चुकी है. संविधान के अनुच्छेद 194 (2) के अंतर्गत आते है.

पंचायत चुनावों से पहले दी मानहानिकारक बयान

अनुच्छेद 194 (2) में कहा गया है, किसी राज्य विधानमंडल का कोई भी सदस्य विधानमंडल या उसकी किसी समिति में कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में किसी कार्यवाही के लिए उत्तरदायी नही होगा और कोई भी व्यक्ति ऐसे विधानमंडल के किसी सदन की तरफ से या उसके प्राधिकार के तहत किसी रिपोर्ट पत्र, मत या कार्यवाही के प्रकाशन के संबंध में ऐसा उत्तरदायी नही होगा. बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने विवेक तन्खा की ओर से मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वी. डी. शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ दायर मानहानि के मामले को 25 अक्टूबर को रद्द करने से इनकार कर दिया था.

मामले की सुनवाई के दौरान विवेक तन्खा ने कहा था कि 2021 में मध्य प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले मानहानिकारक बयान दिए गए थे. जबलपुर के स्पेशल कोर्ट ने 20 जनवरी 2024 को तीनों भाजपा नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत मानहानि का मामला दर्ज कर समन जारी किया था. बता दें कि कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था. तन्खा का कहना है कि उन्हें साल 2012 में मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्क विरोधी बताया गया.

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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