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Madhya Pradesh High Court

Chambal Dacoity Law: डकैती और अपहरण की घटनाओं पर काबू पाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने विशेष कानून बनाया था. हालांकि अब करीब 45 साल पुराने इसी कानून को खत्म करने की मांग को लेकर मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है. लहार से पूर्व विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने इस कानून की मौजूदा जरूरत और इसके इस्तेमाल को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी को कोई आपत्ति न हो तो अदालत देशद्रोह के मुकदमे चला सकता है.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार के चर्चित भोजशाला विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूरे परिसर को मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर घोषित किया है. अदालत ने ASI की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में मिले सनातन प्रतीकों को आधार मानते हुए हिंदू पक्ष के हक में फैसला दिया.

भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट द्वारा दिए गए एसआईटी जांच और एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगा दी है.

Madhya Pradesh High Court: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विजय शाह के कर्नल सोफिया पर विवादित बयान पर 4 घंटे में FIR का आदेश दिया. कांग्रेस का हमला, शाह ने माफी मांगी. सुनवाई सोमवार को.

सुप्रीम कोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान को मानहानि मामले में राहत दी, अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी. चौहान के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के रासायनिक कचरे को जलाने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है. इस मामले में पीथमपुर के गांवों में स्वास्थ्य खतरे को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं.

कांग्रेस विधायक चंदा सिंह गौर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग और अन्य पक्षों को 4 सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है. यह मामला 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल सिंह लोधी द्वारा उनकी चुनावी जीत को चुनौती देने से जुड़ा है.

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के मामले में फैसला सुनाया कि यदि बच्चे माता-पिता की देखभाल नहीं करते, तो माता-पिता द्वारा की गई गिफ्ट डीड को रद्द किया जा सकता है. कोर्ट ने इस फैसले के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जरूरत को भी प्रमुखता दी.

इस मामले में एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस संस्था ने एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें ओबीसी को उनकी जनसंख्या के अनुसार आरक्षण देने की मांग की गई थी.