West Bengal Coal Smuggling: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विनेश चंदेल को 13 अप्रैल को गिरफ्तार किया था. आरोप है कि आई-पैक कंपनी के जरिए लगभग 50 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से घुमाया गया. चंदेल ने अपनी मां के खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत मांगी थी, जिसे कोर्ट ने ‘असाधारण परिस्थितियों’ की कमी बताते हुए नामंजूर कर दिया.
ईडी के अनुसार, यह मामला 2,742 करोड़ रुपये के बड़े कोयला तस्करी घोटाले का हिस्सा है, जिसमें हवाला के जरिए भी करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए. इस मामले की जांच सीबीआई और ईडी दोनों कर रही हैं, और इसमें कई बड़े नामों सहित आई-पैक के अन्य निदेशकों पर भी शिकंजा कसा गया है.
आई-पैक के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल की ओर से दायर नियमित जमानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट 30 अप्रैल को सुनवाई करेगा. हालही में कोर्ट ने विनेश चंदेल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें अंतरिम जमानत की मांग की गई थी. कोर्ट ने कहा कि चंदेल पर देश की वित्तीय व्यवस्था को प्रभावित करने वाले गंभीर आर्थिक अपराधों के आरोप है.
उनकी याचिका असाधारण मानवीय आधार पर तय सीमा को पूरा नहीं करता है. एडिशनल सेशन जज शेफाली बरनाला टंडन ने कहा था कि यह स्थापित कानून है कि अंतरिम जमानत देना, विशेष रूप से धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपराधों में एक सामान्य बात नहीं मानी जानी चाहिए और यह बाध्यकारी, तत्काल और असाधारण परिस्थितियों पर आधारित होनी चाहिए.
चंदेल ने अपनी मां बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के मानवीय आधार पर अंतरिम राहत का अनुरोध किया था. चंदेल को 13 अप्रैल को ईडी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था. विनेश चंदेल को ईडी ने पश्चिम बंगाल के कथित कोयला घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है. ईडी के मुताबिक यह मामला सिर्फ कोयले की अवैध तस्करी तक सीमित नहीं है. बल्कि इसमें पैसों के लेन-देन का जाल काफी बड़ा है.
विनेश चंदेल आई पैक कंपनी के फाउंडर, डायरेक्टर और 33 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले प्रमुख व्यक्ति है. ईडी का आरोप है कि कंपनी के जरिए करीब 50 करोड़ रुपए की संदिग्ध राशि को मनी लांड्रिंग के माध्यम से घुमाया गया है. आई पैक जिसे प्रतीक जैन ने स्थापित किया था, 2021 से तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार को चुनावी संबंधी सेवाएं दे रही है.
इस गिरफ्तारी के बाद राज्य में हलचल तेज हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय ने 2 अप्रैल को इस मामले में दिल्ली बेंगलुरु और मुंबई समेत कई स्थानों पर छापेमारी की थी.
इनमें आई पैक के एक अन्य सह संस्थापक ऋषि राज सिंह, पूर्व आप संचार प्रभारी विजय नायर के ठिकाने भी शामिल थे. ईडी ने कोयला तस्करी से जुड़े 2742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर आई पैक डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था. सीबीआई ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को एफआईआर दर्ज की थी. ईडी ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी.
आई पैक भारत की पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है, जो राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है. आरोप है कि 20 करोड़ हवाला के जरिए आई पैक तक ट्रांसफर हुए. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार ने जांच में बाधा डाली और सबूत नष्ट किए.
-भारत एक्सप्रेस
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