उम्रकैद की सजा काट रहे जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के आतंकवादी यासीन मलिक ने दिल्ली हाई कोर्ट में 85 पेज का हलफनामा दाखिल किया है. जिसमें उसने दावा किया है कि 1994 में जेल से रिहा होने के बाद उसने कई केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, विदेशी राजनयिकों और इंटेलिजेंस के अधिकारियों के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से मुलाकात की थी. हलफनामे में मलिक ने दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 2006 में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के साथ पाकिस्तान में हुई मुलाकात के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने उसे व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया और उसकी सराहना की.
मलिक ने दावा किया कि इंटेलिजेंस ब्यूरों के कहने पर उसने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी हाफिज सईद से मुलाकात की थी. यासीन मलिक ने दावा किया कि पाकिस्तान से लौटने के बाद आईबी ने उसे ब्रीफ किया और उसी शाम तत्कालीन प्रधानमंत्री से मिलने को कहा. नई दिल्ली में हुई बैठक में तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नारायणन भी मौजूद थे. बावजूद इसके उनकी मीटिंग का गलत मतलब निकाला गया. मीडिया के जरिए देश के सामने गलत तरीके से पेश किया और टेरर फंडिंग के आरोप लगाकर आतंकी करार दे दिया.
यूएपीए की धारा लगाकर उम्रकैद की सजा सुनाकर जेल में डाल दिया गया. इससे पहले यासीन मलिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर कहा था कि वह आतंकवादी नहीं है. उसने देश के पांच प्रधानमंत्रियों पी वी नरसिम्हा राव, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, गुजराल, देवेगौड़ा के कहने पर जम्मू कश्मीर के समाधान के लिए काम किया है. वह विदेश तक गया. उसने दावा किया था कि वह राजनीतिक व्यक्ति है, आतंकवादी नहीं है.
इसपर जस्टिस अभय एस ओका ने कहा था कि आप राजनेता हैं या आतंकवादी. यहां पर सवाल यह नहीं है हमारे समक्ष सिर्फ ट्रायल स्थानांतरित करने का मामला है. मलिक ने यह भी कहा था कि सीबीआई की आपत्ति यह है कि मैं सुरक्षा के लिए खतरा हूं. मैं उसी का जवाब दे रहा हूं. मैंने और मेरे संगठन के खिलाफ किसी भी आतंकवादी को समर्थन देने या किसी भी तरह का ठिकाना मुहैया कराने के लिए एक भी एफआईआर दर्ज नहीं है. मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज है, लेकिन वो सभी मेरे अहिंसक राजनीतिक विरोध से संबंधित है.
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबैया सईद की 1989 में हुई अपहरण के मामले में जम्मू की निचली अदालत ने 20 सितंबर 2022 को पारित आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे. उसी उसी दौरान यासीन मलिक अदालत में पेश हुआ था.
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-भारत एक्सप्रेस
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