All Season Mango Variety
All Season Mango Variety: भारत में आम को गर्मियों का फल माना जाता है. मई और जून का महीना खत्म होते ही बाजारों से आम गायब होने लगते हैं और आम के शौकीनों को अगले साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है. लेकिन गुजरात के वडोदरा जिले के प्रगतिशील किसानों ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल दिया है. वडोदरा के कुछ चुनिंदा इलाकों में किसान अब ‘बारहमासी आम’ (All-Time / Perennial Mango) की सफल व्यावसायिक खेती कर रहे हैं. इन दिनों वडोदरा के इन विशेष बगीचों में आम के पेड़ फलों और बौर (मंजर) से पूरी तरह लदे हुए हैं, जो कृषि जगत में एक बड़े और सफल बदलाव का संकेत है.
वडोदरा के बागवानों के अनुसार, बारहमासी आम की इस विशेष किस्म (जैसे सदाबहार, काटीमोन और थाई ऑल-टाइम) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी एक मौसम की मोहताज नहीं होती है. यह पेड़ साल में मुख्य रूप से तीन बार-गर्मियों के नियमित सीजन में, मानसून के बाद (सितंबर-अक्टूबर) और सर्दियों के दिनों में भी फल देता है. इस वजह से किसानों के बगीचों में साल के 12 महीने अलग-अलग चरणों में फल तैयार होते रहते हैं. जब देश के बाकी हिस्सों में आम का सीजन पूरी तरह खत्म हो जाता है, तब वडोदरा के इन खेतों में आम की नई फसल तुड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हो रही होती है.
इस अनोखी खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है इससे होने वाला बंपर मुनाफा. सामान्य सीजन (मई-जून) के दौरान बाजारों में आम की आवक बहुत ज्यादा होती है, जिससे किसानों को सही कीमत नहीं मिल पाती है. लेकिन अक्टूबर से फरवरी के बीच जब बाजार में आम की मांग बहुत ज्यादा और सप्लाई शून्य होती है, तब वडोदरा के किसानों का यह बारहमासी आम हाथों-हाथ बिक जाता है. ऑफ-सीजन में इस आम की कीमत सामान्य दिनों के मुकाबले 3 से 4 गुना अधिक मिलती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भारी सुधार हो रहा है.
यह भी पढ़ें: ट्रैवलिंग से दूर होगा तनाव, घूमने की आदत से मिलेंगे मेंटल हेल्थ के 5 बड़े फायदे
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, बारहमासी आम के पौधे ग्राफ्टिंग (कलम) तकनीक से तैयार किए जाते हैं. इन पौधों की ऊंचाई बहुत ज्यादा नहीं होती, जिसके कारण इन्हें सघन बागवानी (High-Density Plantation) के तहत कम दूरी पर भी लगाया जा सकता है. वडोदरा की मिट्टी और जलवायु इस खेती के लिए बेहद अनुकूल साबित हुई है. इन पौधों में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी सामान्य आम के पेड़ों से बेहतर होती है. टपक सिंचाई (Drip Irrigation) का उपयोग करके किसान बेहद कम पानी में भी इसका शानदार उत्पादन ले रहे हैं, जिससे लागत काफी कम हो जाती है.
वडोदरा के इन सदाबहार आम के बगीचों की चर्चा अब सिर्फ गुजरात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के किसान भी इस अनूठी तकनीक को देखने और समझने के लिए यहां पहुंच रहे हैं. कृषि विभाग के अधिकारी भी वडोदरा के किसानों के इस मॉडल की सराहना कर रहे हैं और अन्य क्षेत्रों के किसानों को भी इस ऑफ-सीजन फार्मिंग को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. यह प्रयोग साफ दर्शाता है कि अगर सही तकनीक और सूझबूझ का इस्तेमाल किया जाए, तो पारंपरिक खेती को भी एक बेहद मुनाफे वाले बिजनेस में बदला जा सकता है.
भारत एक्सप्रेस
US Midterm Elections 2026: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के 57 उम्मीदवारों ने…
दिल्ली में वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को सुनवाई करेगा. 33…
गोरखपुर में बीजेपी की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा’ के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन…
नीति आयोग में अण्डमान-निकोबार के उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा ने विकास मॉडल प्रस्तुत किया. हवाई…
सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ का फैसला- राज्यों को सेल्स टैक्स पर…
केंद्र सरकार ने 2,814 करोड़ रुपये की 'महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए…