Shahtoot Ke Fayde: प्रकृति ने ऐसे कई फल-फूल दिए हैं, जो स्वाद के साथ ही सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं. ऐसा ही गर्मियों में मिलने वाला फल है शहतूत, जो न सिर्फ स्वादिष्ट, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसका वैज्ञानिक नाम मोरस इंडिका है. बिहार सरकार का वन, जलवायु एवं पर्यावरण विभाग शहतूत के सेवन से मिलने वाले फायदों से अवगत कराता है.
यह पेड़ स्वाद और सेहत का अनोखा संगम है. शहतूत के रसीले फल तो खाए जाते हैं, लेकिन इसकी पत्तियां भी पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं और रेशम उद्योग की नींव हैं. शहतूत एक तेजी से बढ़ने वाला मध्यम आकार का पेड़ है, जो आमतौर पर 10 से 15 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाता है. इसके फल बेहद रसीले और मीठे होते हैं. ये सफेद, गुलाबी या गहरे बैंगनी रंग के हो सकते हैं. स्वाद के साथ-साथ ये फल औषधीय गुणों से भी भरपूर होते हैं. लोग इन्हें ताजा खाने के अलावा जूस, जेली, मुरब्बा और सूखे रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.
शहतूत के फलों में विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. ये फल रक्त शुद्ध करने, पाचन सुधारने, एनीमिया दूर करने और इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर माने जाते हैं. आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में शहतूत का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है.
शहतूत की पत्तियां सिर्फ रेशम के कीड़ों का भोजन ही नहीं हैं, बल्कि इनमें भी ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इन पत्तियों को चाय, पाउडर और सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. पत्तियों में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं. इनका सेवन ब्लड शुगर कंट्रोल करने और कोलेस्ट्रॉल कम करने में फायदेमंद है.
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सेहत और स्वाद के साथ ही शहतूत का पेड़ रेशम उद्योग का भी आधार है. रेशम के कीड़े इन्हीं पत्तियों को खाकर रेशम पैदा करते हैं. भारत में शहतूत की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का साधन भी बनती है. इस पेड़ की छाल गहरे भूरे रंग की और खुरदरी होती है. पेड़ पर्यावरण के लिए भी बहुत उपयोगी है क्योंकि यह तेजी से बढ़ता है और मिट्टी को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है.
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