Nautapa 2026 Heatwave Alert: देश के एक बड़े हिस्से में भीषण गर्मी का दौर जारी है, लेकिन असली ‘अग्निपरीक्षा’ अब शुरू होने जा रही है. हिंदू पंचांग और खगोलीय गणना के अनुसार, साल के सबसे गर्म ९ दिन यानी ‘नौतपा’ की शुरुआत हो चुकी है. इन 9 दिनों के दौरान सूर्य की स्थिति पृथ्वी के इतनी नजदीक और सीधी होती है कि उत्तर-मध्य भारत के कई शहरों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है. मौसम विभाग (IMD) ने भी नौतपा के दौरान गंभीर ‘हीटवेव’ (Severe Heatwave) और लू का रेड अलर्ट जारी किया है. डॉक्टरों का कहना है कि इन ९ दिनों में थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.
ज्योतिष शास्त्र और खगोल विज्ञान (Astronomy) के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshatra) में प्रवेश करता है, तो नौतपा की शुरुआत होती है. सूर्य इस नक्षत्र में कुल १५ दिनों तक रहता है, लेकिन इसके शुरुआती ९ दिन सबसे ज्यादा तपिश वाले होते हैं, इसलिए इसे ‘नौतपा’ कहा जाता है.
सीधी किरणें (Direct Sunlight): वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, इस दौरान उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर लंबवत (Vertical) पड़ती हैं.
कम दूरी: पृथ्वी और सूर्य के बीच की कोणीय दूरी इस तरह सेट होती है कि वायुमंडल को चीरती हुई धूप सीधे जमीन को झुलसाती है. चूंकि इस दौरान हवा की रफ्तार भी अक्सर कम होती है, इसलिए धरती एक तवे की तरह तपने लगती है.
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, नौतपा के दौरान राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में तापमान अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है.
मौसम विभाग की चेतावनी: “इस बार नौतपा के दौरान मैदानी इलाकों में पारा 48 डिग्री सेल्सियस को छू सकता है. साथ ही, थार रेगिस्तान से आने वाली सूखी और गर्म हवाएं ‘कंक्रीट के जंगलों’ (शहरों) को भट्टी बना देंगी.”
इस दौरान केवल दिन ही नहीं, बल्कि रातें भी बेहद गर्म होने वाली हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘वॉर्म नाइट्स’ (Warm Nights) कहा जाता है. रात का तापमान भी 32 से 35 डिग्री के आसपास रहने से लोगों को चौबीसों घंटे गर्मी से राहत नहीं मिलेगी.
भले ही नौतपा आम जनता को बेहाल कर देता है, लेकिन कृषि और पर्यावरण के लिहाज से इसका तपना बेहद जरूरी माना जाता है. पुरानी कहावत और विज्ञान दोनों मानते हैं कि नौतपा में जितनी ज्यादा गर्मी पड़ेगी, मानसून उतना ही मजबूत होगा.
लो प्रेशर एरिया (Low Pressure Zone): जब नौतपा के दौरान मैदानी इलाके अत्यधिक गर्म होते हैं, तो वहां की हवा हल्की होकर ऊपर उठ जाती है. इससे जमीन पर एक मजबूत ‘लो प्रेशर एरिया’ (कम दबाव का क्षेत्र) बनता है.
मानसून को खींचना: इस कम दबाव को भरने के लिए समुद्र की तरफ से ठंडी और नमी से भरी हवाएं (Monsoon Winds) तेजी से मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ती हैं. यानी, नौतपा जितना तपेगा, देश में उतनी ही अच्छी और समय पर बारिश होगी.
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इस भीषण गर्मी और हीटवेव के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय और डॉक्टरों ने विशेष गाइडलाइन जारी की है. इस दौरान शरीर में पानी की कमी (Dehydration) सबसे बड़ी चुनौती होती है.
दोपहर में निकलने से बचें: सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब सूरज की किरणें सबसे तीखी होती हैं, बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें.
हाइड्रेशन है ढाल: दिनभर में कम से कम 4-5 लीटर पानी पिएं. सादे पानी के अलावा नींबू पानी, छाछ, ओआरएस (ORS) का घोल और नारियल पानी का इस्तेमाल करें.
सूती और हल्के कपड़े: बाहर निकलते समय शरीर को पूरी तरह ढक कर रखें. सूती (Cotton) और हल्के रंग के कपड़े पहनें, जो पसीने को सोख सकें और शरीर को ठंडा रखें.
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-भारत एक्सप्रेस
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