महाकवि गोपाल दास नीरज की स्मृति में ‘कारवाँ गीतों का…’, CMD उपेन्द्र राय का संबोधन
हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष, पद्मभूषण महाकवि गोपाल दास ‘नीरज’ जी की 8वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मायानगरी मुंबई का रंग शारदा ऑडिटोरियम सुर, लय और साहित्य के अनूठे संगम का गवाह बना. ‘महाकवि गोपाल दास नीरज फाउंडेशन ट्रस्ट’ और ‘भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘कारवाँ गीतों का..नीरज’ कार्यक्रम में देश की कई नामचीन हस्तियों, साहित्यकारों और संगीत प्रेमियों ने शिरकत की.
कार्यक्रम के संरक्षक और ‘भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क’ के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय ने मंच से अपने विचार व्यक्त करते हुए महाकवि गोपाल दास ‘नीरज’ से अपने गहरे और आत्मीय संबंधों को साझा किया. उन्होंने न केवल गोपाल दास ‘नीरज’ के कालजयी गीतों को याद किया, बल्कि अपने जीवन और पत्रकारिता के सफर में उनके प्रभाव का भी भावुकता से जिक्र किया.
मंच पर अपना संबोधन शुरू करते हुए CMD उपेन्द्र राय ने कहा कि नीरज जी के दोनों सुपुत्र शशांक और मृगांक वर्ष 2010 से उनके साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “मैं इस कार्यक्रम में कोई मेहमान बनकर नहीं आया हूँ, बल्कि मैं इसी परिवार का हिस्सा हूँ और इस परिवार का गार्जियन (अभिभावक) हूँ. बीते आठ सालों से नीरज जी के भौतिक रूप से दूर जाने के बाद हम लगातार इसी तरह उन्हें याद करते आ रहे हैं.”
मुंबई के बांद्रा वेस्ट स्थित प्रतिष्ठित रंग शारदा ऑडिटोरियम में पद्मभूषण महाकवि गोपाल दास ‘नीरज’ जी की 8वीं पुण्यतिथि पर एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर महाकवि नीरज जी और संगीत जगत की कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में मैंने भी… pic.twitter.com/URIBnJHpzk
— Upendrra Rai (@UpendrraRai) July 23, 2026
महाकवि नीरज जी से अपनी पहली मुलाकात का संस्मरण सुनाते हुए CMD उपेन्द्र राय ने बताया, “11 फरवरी 2010 को इंदौर में एक कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह आयोजित हुआ था. उस दिन ‘भरोसा पत्रकार सम्मान’ मुझे और आदरणीय जावेद अख्तर साहब को एक ही ट्रॉफी के रूप में शेयर करके दिया गया था. सबसे खास बात यह थी कि वह पुरस्कार हमें स्वयं महाकवि नीरज जी के हाथों प्राप्त हुआ था.”
उन्होंने आगे कहा कि कवि का मन किसी मासूम बच्चे की तरह बेहद कोरा, निर्मल और निष्छल होता है. जिस तरह बच्चा बिना किसी काम के व्यस्त रहता है और बिना वजह खुश रहता है, ठीक वैसा ही भाव एक सच्चे कवि के भीतर विद्यमान होता है.
‘भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क’ के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय ने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि नीरज जी के जीवन के अंतिम दिनों में जब वे व्हीलचेयर पर उनसे मिलने दफ़्तर आए थे, तो उन्होंने उनसे एक अनसुलझा सवाल पूछा था.
CMD उपेन्द्र राय ने कहा, “मैंने नीरज जी से पूछा कि मैंने अपनी जिंदगी में ओशो (आचार्य रजनीश) को खूब पढ़ा है. ओशो ने अपने प्रवचनों में दर्जनों बार आपका जिक्र किया है, आपके और उनके रिश्ते कैसे थे? इस पर नीरज जी मुस्कुराए और बोले कि ओशो मेरे सबसे गहरे दोस्त थे और जिंदगी में मुझे सबसे गहरा प्रेम उन्हीं से था.”
इसके बाद नीरज जी ने बताया था कि कैसे ओशो की याददाश्त इतनी अद्भुत थी कि वे डेढ़ लाख किताबों का निचोड़ याद रखते थे. जब उपेन्द्र राय ने उपनिषद की एक मोटी किताब उठाकर ओशो का टेस्ट लेना चाहा था, तो ओशो ने उस किताब के पन्ने पलटकर धाराप्रवाह पंक्तियां सुना दी थीं, जिसे देखकर नीरज जी भी हैरान रह गए थे.
पत्रकारिता के अपने सफर पर बात करते हुए CMD उपेन्द्र राय ने कहा, “मैं भारत का ऐसा पत्रकार होने का गौरव रखता हूँ जिसने मीडिया की दशा और दिशा बदलने के लिए काम किया. मैंने अपने गुरु उदय शंकर जी से सीखा कि कभी अपना चेहरा बेचने की कोशिश मत करो, बल्कि नए चेहरे गढ़ो. आज बड़े-बड़े चैनलों पर जो एंकर बने बैठे हैं, वे तो बन चुके, लेकिन हमारी जिम्मेदारी है कि हम नई पीढ़ी को मौका दें और नए टैलेंट को तैयार करें.”
महाकवि गोपाल दास नीरज के काव्य योगदान को नमन करते हुए उपेन्द्र राय ने कहा कि नीरज जी ने हिंदी सिनेमा को 150 से अधिक ऐसे कालजयी गीत दिए हैं जो आज भी हर पीढ़ी के जुबान पर हैं. एसडी बर्मन, शंकर-जयकिशन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और जयदेव जैसे महान संगीतकारों के साथ मिलकर उन्होंने संगीत का स्वर्णिम इतिहास लिखा.
अपने जीवन के कठिन समय को याद करते हुए उपेन्द्र राय भावुक हो गए और उन्होंने नीरज जी की अमर पंक्तियां गुनगुनाईं:
“छिप-छिप अश्रु बहाने वालों! मोती व्यर्थ लुटाने वालों!
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है…
डूबे बिना नहाने वालों, गीली उम्र बिताने वालों!
कुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता है.”
उन्होंने हाल ही में लंदन से लौटते समय एयरपोर्ट पर नीरज जी की याद में लिखी अपनी पंक्तियां भी सुनाईं:
“तेरी मोहब्बत में हम सादा रहेंगे,
तू आए न आए, हम आधा ही रहेंगे.”
महाकवि गोपालदास ‘नीरज’ का निधन 19 जुलाई 2018 को हुआ था. उनका जन्म 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के ब्लॉक महेवा के निकट पुरावली गांव में हुआ था. वे भारतीय साहित्य जगत की पहली ऐसी शख्सियत थे, जिन्हें शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री और पद्म भूषण दोनों सम्मानों से नवाजा गया. इसके अलावा, भारतीय हिंदी फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए उन्हें लगातार तीन बार प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.
मुंबई में आयोजित ‘एक शाम नीरज के नाम’ संध्या में जुटी साहित्य और संगीत प्रेमियों की भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि महाकवि नीरज आज भी अपने गीतों, गजलों और विचारों के माध्यम से करोड़ों दिलों में जीवित हैं.
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