धर्म

शिकागो के जैना कन्वेंशन में गूंजा अहिंसा का मंत्र, आचार्य लोकेश मुनि और स्वामी ज्ञानवत्सल ने मिलकर दिखाई करुणा की राह

अमेरिका और कनाडा की यात्रा पर निकले आचार्य लोकेश मुनि ने दुनिया को शांति, सद्भाव और करुणा का संदेश दिया है. इस दौरे की शुरुआत अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित जैना कन्वेंशन 2025 के उद्घाटन समारोह से हुई. इस बार कन्वेंशन की थीम है “यूनिटी एंड डायवर्सिटी: ए पाथ ऑफ पीस”, यानी विविधता में एकता के ज़रिए शांति का रास्ता.

शिकागो में दिए अपने संदेश में आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि आज जब दुनिया अशांति और टकराव के दौर से गुजर रही है, तब महावीर स्वामी का ‘अनेकांत दर्शन’ पहले से कहीं ज़्यादा प्रासंगिक हो गया है. उन्होंने कहा,

“दुनिया जिस मोड़ पर खड़ी है, वहां तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडरा रहा है. ऐसे समय में अगर कुछ बचा सकता है, तो वो है अहिंसा का मार्ग. यही महावीर का दर्शन है, जो हमें सिखाता है कि अलग-अलग विचार होते हुए भी हम एक साथ रह सकते हैं.”

ज्ञानवत्सल स्वामीजी ने भी दिया संदेश

इस खास मौके पर स्वामीनारायण परंपरा से जुड़े और देश-विदेश में मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर चर्चित ज्ञानवत्सल स्वामीजी भी मौजूद थे. उन्होंने भी शांति और सहिष्णुता का संदेश देते हुए कहा, “भगवान महावीर ने सिखाया कि हर दृष्टिकोण का सम्मान जरूरी है, और भगवान स्वामी नारायण ने बताया कि सदाचार ही सच्चा धर्म है. इन शिक्षाओं में ही आज की दुनिया की जरूरत छिपी है.”

ज्ञानवत्सल स्वामी ने आगे कहा,

“हमारे गुरु ब्रह्मस्वामी महाराज हमेशा कहते थे कि दूसरों के आनंद में ही हमारा आनंद है, दूसरों की प्रगति में ही हमारी प्रगति है. यही सोच लेकर हम समाज सेवा के रास्ते पर चलते हैं.”

जैना कन्वेंशन बना आध्यात्मिक समागम का केंद्र

शिकागो में हो रहा जैना कन्वेंशन न सिर्फ जैन समुदाय के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति और सद्भाव का एक बड़ा मंच बन गया है. यहां भारत से लेकर अमेरिका-कनाडा तक के संत, विद्वान और सामाजिक कार्यकर्ता जुटे हैं. सभी का मकसद है दुनिया को बताना कि अगर हमें एक बेहतर भविष्य चाहिए, तो रास्ता करुणा और अहिंसा से होकर ही जाता है.

ये भी पढ़ें- अमेरिका और कनाडा में शांति-सद्भाव का संदेश दे रहे जैन धर्मगुरु आचार्य लोकेश मुनि, कई शहरों में होंगे कार्यक्रम

इस यात्रा के ज़रिए आचार्य लोकेश मुनि और उनके साथ जुड़े संत यह संदेश दे रहे हैं कि चाहे धरती के किसी भी कोने में क्यों न हों, शांति की खोज और मानवता का सम्मान यही सबसे बड़ा धर्म है.

– भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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