गुजरात के समृद्ध पादप संसार (फ्लोरा) में एक और नया और दुर्लभ अध्याय जुड़ गया है. गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन (GEER – गीर फाउंडेशन) के वनस्पति विज्ञानियों एवं शोधकर्ताओं ने ‘रुंजिया रिपेंस’ (Rungia repens) पौधे की एक बिल्कुल नई और सफेद फूलों वाली किस्म की पहचान की है.
इस नई पहचानी गई किस्म का वैज्ञानिक नाम ‘रुंजिया रिपेंस वैरायटी अल्बा’ (Rungia repens var. alba) रखा गया है, जिसमें ‘अल्बा’ शब्द इसके सफेद रंग के पुष्पों को दर्शाता है.
गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने इस उल्लेखनीय खोज के लिए गीर फाउंडेशन के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए बताया कि यह खोज छोटाउदेपुर जिले में नर्मदा कैनाल कमांड क्षेत्र में जैव-विविधता अध्ययन के दौरान हुई. यह अध्ययन मध्य एवं दक्षिण गुजरात में ‘नर्मदा कैनाल प्रणाली का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र (जैव विविधता, मिट्टी व जल गुणवत्ता) पर प्रभाव’ नामक विस्तृत परियोजना के तहत किया जा रहा था.
वहीं, वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में वन विभाग निरंतर वनस्पतियों के संरक्षण हेतु शोध कार्य कर रहा है, जिससे राज्य की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को संजोने में नई दिशा मिल रही है.
शोध दल के प्रमुख सदस्य डॉ. राजकुमार यादव ने बताया कि आमतौर पर पाई जाने वाली ‘रुंजिया रिपेंस’ प्रजाति में नीले अथवा बैंगनी रंग के फूल खिलते हैं. इसके विपरीत, इस नई खोजी गई किस्म की विशेषताएं इस प्रकार हैं:
सफेद पंखुड़ियां: इसमें पूरी तरह दूधिया सफेद कोरोला (फूल की पंखुड़ियां) होती हैं.
बनावट: इसमें मध्यम आकार के पुष्प दंड (फ्लावर स्पाइक्स) और हरे-सफेद नुकीले सिरों वाले छोटे सहपत्र (Bracts) पाए जाते हैं.
पुष्प व फल का समय: इसमें फूल आने की अवधि फरवरी से अप्रैल और फल आने का समय मई से जून दर्ज किया गया है. जबकि सामान्य किस्म में फूल अगस्त से जनवरी के बीच आते हैं.
गीर फाउंडेशन के उप निदेशक अमित कुमार नायक (IFS) ने बताया कि मौजूदा हर्बेरियम नमूनों के साथ गहन मोर्फोलॉजिकल (आकारिकीय) परीक्षण के बाद ही इसे नई किस्म के रूप में सत्यापित किया गया.
डॉ. राजकुमार यादव के अनुसार, इस प्रतिष्ठित शोध को वानिकी (फॉरेस्ट्री) के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘इंडियन फॉरेस्टर’ (Indian Forester) में प्रकाशन हेतु स्वीकार कर लिया गया है. इस खोज दल में डॉ. राजकुमार यादव, नमन नायक, विनेश गामित, अमित कुमार नायक (IFS) और बी.पी. पति (IFS) शामिल रहे.
गीर फाउंडेशन के निदेशक बी.पी. पति (IFS) ने बताया कि पौधे के तीन परिपक्व नमूनों को संरक्षित कर फाउंडेशन के हर्बेरियम (GEERF) में सुरक्षित रखा गया है. उल्लेखनीय है कि हाल ही में गीर फाउंडेशन हर्बेरियम को द न्यूयॉर्क बॉटनिकल गार्डन (NYBG) द्वारा प्रकाशित ‘इंडेक्स हर्बेरियोरम’ में आधिकारिक एक्रोनिम प्राप्त हुआ है, जिससे वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को भारत के इन शोध नमूनों का संदर्भ लेना और आसान हो गया है.
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