aaj ka panchang
Aaj Ka Panchang 1 December 2025: 1 दिसंबर 2025 का दिन हिंदू पंचांग के अनुसार अत्यंत शुभ और पवित्र है. मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि होने के साथ आज मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. एक ओर यह दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर देता है, वहीं दूसरी ओर कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए भगवद्गीता उपदेश की स्मृति का भी पावन दिन है.
सोमवार होने के कारण इस दिन शिवपूजन का भी विशेष महत्व है. एकादशी और सोमवार का संगम कई तरह के शुभ योग बनाता है, जिससे यह दिन और भी अधिक मंगलकारी हो जाता है. धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन उपवास, पूजा, दान और गीता पाठ करने से पापों का क्षय होता है और पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.
सूर्योदय: 06:56 AM होगा. सूर्यास्त: 05:24 PM होगा. चंद्रोदय: 02:22 PM होगा. चंद्रास्त: 03:42 AM (2 दिसंबर) होगा. आज की चंद्र राशि: मीन और मेष है.मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी तिथि आज शाम 7:01 PM तक है, इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी. रेवती नक्षत्र रात 11:18 PM तक रहेगा, उसके बाद अश्विनी नक्षत्र प्रारंभ होगा.
इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं जो पूजा और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं. जानिए आज के ब्रह्म मुहूर्त
कुछ समय ऐसे होते हैं जिन्हें किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है. जानिए आज का अशुभ समय:
1 दिसंबर 2025 को दो प्रमुख पर्व पड़ रहे हैं. पहला मोक्षदा एकादशी और दूसरा गीता जयंती है. दोनों ही दिन आध्यात्मिक प्रगति, आत्मशुद्धि और धार्मिक संकल्पों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं.
मोक्षदा एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह की शुक्ल एकादशी को रखा जाता है. मान्यता है कि इस व्रत से पापों का नाश होता है और पितरों को मोक्ष मिलता है. व्रत करने वालों को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करनी चाहिए.
गीता जयंती वह दिवस है जब श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. यह दिन धर्म, कर्तव्य और आत्मज्ञान का स्मरण कराता है. गीता जयंती के मुख्य संदेश जानें
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1 दिसंबर 2025 का दिन हर दृष्टि से अत्यंत शुभ है. एक तरफ मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती जैसे दिव्य पर्व हैं, वहीं दूसरी तरफ कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं. सोमवार का दिन होने से शिवपूजन का विशेष महत्व बढ़ जाता है. यह दिन आत्मचिंतन, मन की शांति, पितृ कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है. गीता के संदेश और विष्णु पूजा दोनों मिलकर जीवन के हर क्षेत्र में सकारात्मकता और संतुलन लाते हैं.
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