Agni Panchak 2025: हिंदू धर्म में पंचक का समय बेहद अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य या मांगलिक कार्यक्रम करना वर्जित होता है. पंचांग के अनुसार जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से निकलकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में प्रवेश करता है, तब पंचक शुरू होता है.
इस दौरान पांच दिनों तक विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है क्योंकि इस समय किए गए कई कार्यों में विघ्न आ सकते हैं या वे सफल नहीं होते. अप्रैल महीने में यह पंचक 22 तारीख, मंगलवार से शुरू होकर 26 अप्रैल, शनिवार को समाप्त होगा.
पंचक के समय किसी की मृत्यु हो जाए तो इसे बहुत ही अशुभ संकेत माना जाता है. गरुड़ पुराण के अनुसार पंचक में किसी व्यक्ति का देहांत होने पर यह आशंका बनी रहती है कि उसी परिवार में और भी लोगों की जान जा सकती है — कुल मिलाकर पांच मृत्युओं की संभावना बताई जाती है.
लेकिन इस दोष को शांति देने का उपाय भी धर्म ग्रंथों में बताया गया है. मान्यता है कि अगर पंचक के दौरान किसी की मृत्यु हो जाए, तो अंतिम संस्कार से पहले आटे या कुशा से बने पांच पुतले बनाकर शव के साथ रख दिए जाएं और फिर सभी का एक साथ दाह संस्कार कर दिया जाए. ऐसा करने से पंचक दोष टल जाता है.
अगर पंचक की शुरुआत मंगलवार के दिन हो, तो उसे अग्नि पंचक कहा जाता है. अग्नि पंचक का प्रभाव और भी ज्यादा तीव्र माना गया है. इस बार पंचक की शुरुआत मंगलवार, 22 अप्रैल को हो रही है, इसलिए यह अग्नि पंचक होगा, जो 26 अप्रैल तक चलेगा.
अग्नि पंचक के दौरान कुछ खास कार्यों को करना वर्जित होता है, क्योंकि इन्हें करने से नुकसान की आशंका रहती है. आइए जानें किन कार्यों से बचना चाहिए:
हालांकि पंचक को अशुभ माना जाता है, लेकिन कुछ विशेष मामलों में यह समय लाभदायक भी हो सकता है. जैसे कोर्ट-कचहरी या कानूनी मामलों में इस दौरान सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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