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Sawan 2025: सावन में क्यों पहनती हैं महिलाएं हरी चूड़ियां? जानिए इसके पीछे छुपे गहरे राज

Sawan 2025: सावन का महीना सिर्फ पूजा-पाठ और व्रत-उपवास का ही नहीं, बल्कि सुहागिन औरतों के लिए खास मायने रखता है.

इस मौसम में जहां चारों ओर हरियाली छा जाती है, वहीं महिलाएं भी हरे रंग के कपड़े और खासकर हरी चूड़ियों को अपने श्रृंगार का हिस्सा बनाती हैं.

आपने भी देखा होगा कि सावन में ज्यादातर महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं, लेकिन क्या कभी सोचा है कि इसके पीछे सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि कई गहरे वैज्ञानिक, मानसिक और धार्मिक कारण भी छिपे हैं?

मां पार्वती का प्रिय रंग

सावन के महीने में देवी पार्वती और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है. माना जाता है कि मां पर्वती को हरा रंग काफी पसंद है इसलिए स्त्रियां उन्हें प्रसन्न करने के लिए हरे रंग की चूड़ियां या वस्त्र पहनती हैं.

हरे रंग से जुड़ी मानसिक शांति और ऊर्जा

हरे रंग को प्रकृति, शांति और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है. आयुर्वेद और रंग-चिकित्सा भी मानते हैं कि हरा रंग तनाव, चिंता और चिड़चिड़ेपन को कम करता है.

जब महिलाएं सावन में हरी चूड़ियां पहनती हैं तो उनका मन ज्यादा शांत और संतुलित रहता है. साथ ही, चूड़ियों की खनक से शरीर में पॉजिटिव वाइब्स पैदा होती हैं, जो ऊर्जा और उत्साह को बढ़ाती हैं.

सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और पारिवारिक सुख

सावन में शिव और पार्वती की पूजा की जाती है, और माना जाता है कि हरा रंग माता पार्वती को बहुत प्रिय है. महिलाएं जब हरी चूड़ियां पहनती हैं तो वह देवी पार्वती को खुश करने की भावना से करती हैं.

ताकि उन्हें अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिले. यही नहीं, यह भी कहा जाता है कि इससे पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और समर्पण बढ़ता है.

शरीर में संतुलन और चूड़ियों की खनक का असर

हरी चूड़ियों की खनक सिर्फ़ सजावट नहीं है, बल्कि इससे शरीर के भीतर हल्की-हल्की कंपनें होती हैं जो ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाती हैं. यह महिलाएं खुद को ज्यादा एक्टिव, हल्का और पॉजिटिव महसूस करती हैं.

साथ ही, यह ध्वनि घर के माहौल को भी उल्लास से भर देती है. सावन में जब महिलाएं पूजा-पाठ और व्रत करती हैं, तो ये छोटी-छोटी चीजें भी उनके अंदर आत्मबल बढ़ाने का काम करती हैं.


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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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