आस्था

भोग में देरी होते ही पतली हो जाती है Shri Krishna की प्रतिमा, जानें क्या है केरला के इस मंदिर का रहस्य

परमेश्वर के दिव्य मनुज अवतार ‘श्रीकृष्ण’ का इस बार 5253वां जन्मोत्सव है. 4 सितंबर को करोड़ों हिंदु अनुयायी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे. इस अवसर पर BharatExpress.Com पर बीते एक हफ्ते से विशेष प्रस्तुति दी जा रही है. इस आलेख में जानिए उस मंदिर को, जो साल के 365 दिन दर्शन के लिए खुला रहता है और ग्रहण लगने पर भी मंदिर में पूजा-पाठ बंद नहीं होता.

हम बात कर रहे हैं केरल के तिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर की.

भोग में देरी होते ही प्रतिमा हो जाती पतली

थिरुवरप्पु बस स्टैंड के पास स्थित तिरुवरप्पु श्री कृष्ण मंदिर को लेकर कई तरह की मान्यताएं प्रसिद्ध हैं. यह पहला मंदिर है, जहां भगवान श्रीकृष्ण को दिन में 10 बार भोग अर्पित किया जाता है, और अगर भोग अर्पित करने में देरी होती है, तो भगवान की प्रतिमा पतली हो जाती है और कमर पर बंधा कमरबंध भी अपनी जगह से खिसकने लगता है. यही कारण है कि ग्रहण के समय भी भगवान को लगातार भोग लगता रहता है.

स्थानीय लोक मान्यताओं की मानें तो एक बार ग्रहण की वजह से मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए थे और अगले दिन सुबह जब मंदिर के कपाट खोले गए तो भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा एक दिन में ही कमजोर दिखने लगी थी और कमरबंध कमर से नीचे खिसक गया था. तब से लेकर अब तक मंदिर को रात को नौ बजे बंद किया जाता है और सुबह 2 बजे खोल दिया जाता है. भगवान को पहला भोग सुबह 3 बजे अर्पित किया जाता है.

क्यों है कुल्हाड़ी रखने की परंपरा?

मंदिर में कुल्हाड़ी रखने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है. कुल्हाड़ी रखने के पीछे का कारण है कि अगर मंदिर और गर्भगृह के ताले किसी कारणवश नहीं खुल पाते हैं, तो कुल्हाड़ी की सहायता से ताले और दरवाजे को तोड़ा जा सके. गर्भगृह में मौजूद कृष्ण जी की प्रतिमा भी बहुत खास है, जो काले रंग की है और पीले वस्त्रों और आभूषणों से उनका शृंगार किया गया है. प्रतिमा की चार भुजाएं हैं, जो शंख और अस्त्र धारण किए हुए हैं.

माना जाता है कि यह स्वंयभू प्रतिमा पांडवों को मिली थी, जिसे उन्होंने एक संत को स्थापित करने के लिए दिया था. यह प्रतिमा भगवान के उस रूप को दिखाती है, जब उन्होंने कंस का वध किया था. कंस का वध करने के बाद श्री कृष्ण को बहुत तेज भूख लगी थी और अपनी भूख को शांत करने के लिए वे इसी स्थल पर आए थे. मंदिर के परांगण में अन्य मंदिर भी मौजूद हैं. परिसर में कोचंबलम मंदिर, शिव मंदिर, गणपति, सुबरमणियार और सास्ता के मंदिर भी मौजूद हैं.

-भारत एक्सप्रेस

BharatExpress.Com पर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े ये आलेख भी पढ़ सकते हैं:

5253वाँ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव: आज ही के दिन द्वापर युग में परमेश्वर ने लिया था मानव अवतार, पृथ्वी पर 125 वर्ष बिताए

देखिए बृजभूमि में हजारों साल पहले हुईं श्री राधा-कृष्ण की सचित्र बाल लीलाएं, ये अहसास करने दुनियाभर से आते हैं लोग

Shri Krishna ही महाकाल थे: जब युद्धभूमि में प्रकट हुआ माधव का भयंकर रूप… उनके मुख में समा रहे थे सारे योद्धा

Vaibhav Gupta

Recent Posts

फिर सुर्खियों में क्यों आया महादेव बेटिंग ऐप? दुबई से हैदराबाद के सफर में CBI की एंट्री

Mahadev Betting App Controversy: महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में CBI ने एक बहुत बड़ी…

16 minutes ago

‘रील बनाओगे तो मारे जाओगे…’, सम्राट चौधरी के बयान पर भड़के तेजस्वी, बिहार में ‘राक्षस राज’ का किया दावा

बिहार में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और महिलाओं से जुड़ी घटनाओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी…

21 minutes ago

जमुई में नंदन यादव के एनकाउंटर के नाम पर वायरल हो रहे वीडियो, जानिए क्या है हकीकत

बिहार के जमुई में नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में पुलिस एनकाउंटर और गिरफ्तारियों के बीच…

24 minutes ago

‘तोड़ना तो पड़ेगा ही!’ मेरठ में बनी अवैध कॉलोनियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, MDA की भूमिका की होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के बाहरी क्षेत्र स्थित उल्देपुर गांव में बड़े पैमाने पर हुए…

31 minutes ago