Surya Grahan 2026: हिन्दू धर्म में सूर्य ग्रहण और सूतक काल का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व माना जाता है. मान्यता है कि जब भी आसमान में सूर्य ग्रहण लगता है तो उससे कुछ घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो जाता है जिसके दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य या पूजा-पाठ करने की मनाही होती है. आज यानी 12 अगस्त को जहां एक तरफ देश भर में हरियाली अमावस्या का पावन पर्व मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसी दिन साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस ग्रहण का समय क्या है और भारत में इसका क्या प्रभाव रहेगा.
आज रात को 09 बजकर 04 मिनट पर यह सूर्य ग्रहण शुरू होगा और इसका समापन 13 अगस्त की रात को 01 बजकर 28 मिनट पर होगा. लेकिन सबसे राहत की बात यह है कि हरियाली अमावस्या पर लगने वाला यह सूर्य ग्रहण भारत में बिल्कुल भी नजर नहीं आएगा.
चूंकि यह देश में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. इसका सीधा मतलब यह है कि देशवासियों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है. आप बिना किसी रोक-टोक के अपने सभी जरूरी काम, खान-पान और पूजा-पाठ सामान्य रूप से कर सकते हैं.
अगर बात करें कि यह ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा, तो यह मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर, फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोप के ज्यादातर हिस्सों में नजर आएगा.
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भले ही भारत में इस ग्रहण का असर न हो लेकिन धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखना अच्छा माना जाता है.
इस दौरान मन ही मन अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करना चाहिए. खाने-पीने की चीजों में पहले से ही तुलसी के पत्ते डालकर रख लें. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके पूरे घर की साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर घर को शुद्ध करें.
ग्रहण के समय प्रत्यक्ष रूप से पूजा-पाठ करने और भगवान की मूर्तियों को छूने से बचना चाहिए. इस दौरान भोजन करने और चाकू-कैंची जैसी नुकीली चीजों के इस्तेमाल से परहेज करना अच्छा माना जाता है. साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी इस अवधि में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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